उरियम्पेट्टी आदिवासी बस्ती सड़क मामला: केरल हाईकोर्ट सख्त, वन विभाग को 5 अगस्त तक ठोस प्रस्ताव जमा करने का निर्देश

केरल हाईकोर्ट ने एर्नाकुलम जिले की दूरस्थ उरियम्पेट्टी आदिवासी बस्ती को जोड़ने वाली 18 किलोमीटर लंबी वन सड़क की जर्जर स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के वन विभाग को निर्देश दिया है कि वह इस मार्ग की मरम्मत और रखरखाव के लिए 5 अगस्त तक एक ठोस और व्यावहारिक प्रस्ताव अदालत के सामने पेश करे। हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय को बेहद गंभीर और तात्कालिक मानकर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम. की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। याचिका में कुट्टमपुझा पंचायत के अंतर्गत पुय्यमकुट्टी से उरियम्पेट्टी आदिवासी बस्ती तक जाने वाले एकमात्र 18 किलोमीटर के उबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते को पक्की कंक्रीट सड़क में बदलने की मांग की गई है।

आदिवासियों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता पर कोर्ट नाराज

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग जंगल के भीतर रहने वाले जनजातीय समुदाय की व्यावहारिक समस्याओं और दैनिक कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील नहीं है। अदालत ने रेखांकित किया कि जंगल के भीतर एक सुगम सड़क का निर्माण केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि खुद वन विभाग को भी केरल वन अधिनियम के तहत अपने कानूनी कर्तव्यों के निर्वहन के लिए एक बेहतर मार्ग की आवश्यकता होती है।

संबंधित विभागों के समन्वय से हल निकालने के निर्देश

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सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन विभाग को जनजातीय विकास विभाग और अन्य सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके एक साझा योजना तैयार करनी होगी। अदालत ने वन विभाग को निर्देश दिया कि वह 5 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी अंतिम और स्पष्ट योजना रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करे।

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