गुरुवायूर देवस्वम के डिजिटल कायाकल्प के लिए विशेषज्ञ अध्ययन कराने के निर्देश: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवायूर देवस्वम प्रबंध समिति को अपने प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज के पुनर्गठन और एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए किसी विशेषज्ञ संस्थान की सेवाएं लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की पीठ ने सुझाव दिया कि मंदिर प्रबंधन केरल सरकार के स्वायत्त संस्थान ‘सेंटर फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट’ (सीएमडी), नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन के तहत कार्यरत ‘स्टेट ई-गवर्नेंस मिशन टीम’ (एसईएमटी) या किसी अन्य समकक्ष तकनीकी विशेषज्ञता वाले संस्थान से विस्तृत अध्ययन करवा सकता है।

डिजिटल प्रणाली की प्रस्तावित रूपरेखा

हाईकोर्ट के अनुसार, चुना गया सलाहकार संस्थान देवस्वम की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगा, प्रक्रियाओं में मौजूद कमियों की पहचान करेगा और सभी कामकाजों को एक सहज डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर समाधान की सिफारिश करेगा। यह प्रस्तावित प्रणाली मंदिर को मिलने वाले दान, राजस्व प्राप्तियों, खर्चों, संपत्तियों, इन्वेंट्री और ठेके से जुड़ी सभी वित्तीय व प्रशासनिक गतिविधियों की रियल-टाइम ट्रैकिंग करेगी। इसके अलावा, पीठ ने वैधानिक लेखा परीक्षकों और पर्यवेक्षी अधिकारियों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने पर भी जोर दिया, जिससे वे वित्तीय लेनदेन की डिजिटल निगरानी, प्रशासनिक रिकॉर्ड तक त्वरित पहुंच और ऑडिट आपत्तियों के अनुपालन को आसानी से ट्रैक कर सकें।

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ऑडिट में सामने आईं गंभीर कमियां

हाईकोर्ट का यह निर्देश देवस्वम के वैधानिक ऑडिट के दौरान उजागर हुई वित्तीय अनियमतताओं के बाद आया है। केरल राज्य ऑडिट विभाग ने पीठ को सूचित किया कि देवस्वम ने ई-हुंडी और क्रेडिट या डेबिट कार्ड कियोस्क जैसी कैशलेस सुविधाएं तो शुरू कर दीं, लेकिन इन माध्यमों से एकत्र की गई राशि का सही हिसाब-किताब रखने के लिए कोई उचित लेखा ढांचा तैयार नहीं किया। ऑडिट अधिकारियों ने यह भी शिकायत की कि समीक्षा के दौरान देवस्वम प्राधिकारियों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कोर्ट ने टिप्पणी की कि एकीकृत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की अनुपस्थिति के कारण रिकॉर्ड बिखरे रहे, जिससे वित्तीय निगरानी और पारदर्शी ऑडिट में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हुईं।

28 जुलाई को अगली सुनवाई

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का प्रबंधन करने वाले गुरुवायूर देवस्वम जैसे विशाल संस्थान में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत एंटरप्राइज-लेवल डिजिटल प्रबंधन प्रणाली अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि सार्वजनिक विश्वास भी बढ़ेगा। इस मामले में वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए हाईकोर्ट ने गुरुवायूर देवस्वम ऑडिट के प्रभारी केरल राज्य ऑडिट विभाग के वरिष्ठ उप निदेशक को 28 जुलाई को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर नवीनतम स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

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