खराब फोरेंसिक जांच व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट नाराज, साक्ष्यों की कमी के कारण दुष्कर्म-हत्या के आरोपी को मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य की फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं (एफएसएल) में लचर बुनियादी ढांचे और पुरानी मशीनों पर गहरी नाराजगी जताई है। पुख्ता वैज्ञानिक सबूतों के अभाव में अदालत ने दुष्कर्म और हत्या के एक आरोपी को जमानत दे दी। जमानत की अर्जी मंजूर करते हुए अदालत ने कहा कि वह बेहद भारी मन और गहरे दुख के साथ यह कदम उठा रही है, क्योंकि वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी के कारण आरोपी को सीधे तौर पर अपराध से नहीं जोड़ा जा सका।

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी मनोज की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। दरअसल, मृतका के वेजाइनल स्वाब की फोरेंसिक जांच में डीएनए का पूरा प्रोफाइल तैयार नहीं हो सका। इस तकनीकी खामी की वजह से एफएसएल रिपोर्ट यह साबित करने में नाकाम रही कि बरामद किया गया डीएनए आरोपी मनोज का ही था।

अधूरी फोरेंसिक रिपोर्टों पर जताई चिंता

अदालत ने राज्य में फोरेंसिक जांच की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे अधिकांश मामलों में एफएसएल रिपोर्ट से यही सामने आता है कि डीएनए प्रोफाइल पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। इस वजह से डीएनए के स्रोत का पता लगाना मुमकिन नहीं हो पाता और अंततः आरोपी को इसका लाभ मिल जाता है।

यूपी सरकार की अनदेखी को ठहराया जिम्मेदार

अपने 21 मई के आदेश में जस्टिस देशवाल ने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एफएसएल में पुरानी मशीनें और अधूरा बुनियादी ढांचा ही डीएनए प्रोफाइल न बन पाने की मुख्य वजह है। इसके लिए राज्य सरकार के अलावा किसी और को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि सरकार के पास फोरेंसिक प्रयोगशालाओं को बुनियादी सुविधाएं देने के बजाय विचार करने के लिए कई अन्य मुद्दे हैं।

मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने के निर्देश

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हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई है कि उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही सभी फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक मशीनें और पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराएगी ताकि भविष्य में मामलों की गुणवत्ता प्रभावित न हो। इस संबंध में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के लिए, कोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार (कंप्लायंस) को आदेश की एक कॉपी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया, ताकि इसे मुख्यमंत्री के समक्ष अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया जा सके।

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