बेंगलुरु के पीजी संचालकों को हाई कोर्ट का अल्टीमेटम: 2 हफ्ते में सुधारें व्यवस्था, वरना कटेगा बिजली-पानी

बेंगलुरु में पढ़ाई और नौकरी करने वाले लाखों युवाओं से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में, कर्नाटक हाई कोर्ट ने शहर के पेइंग गेस्ट (पीजी) संचालकों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) द्वारा बेंगलुरु ईस्ट डिवीजन में किए गए 1,500 पीजी के औचक निरीक्षण में सुरक्षा और नियमों के गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा है कि पीजी मालिक दो सप्ताह के भीतर नियमों का पालन करने का लिखित शपथ पत्र दें, अन्यथा उनके खिलाफ बिजली-पानी काटने और कानूनी कार्रवाई करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्रवाई इस साल फरवरी में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश के बाद शुरू हुई है, जिसमें ट्रेड लाइसेंस नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पीजी आवासों की जांच के निर्देश दिए गए थे।

जांच में खुली पोल: बेहद खराब हालात और सुरक्षा में बड़ी चूक

जीबीए की ओर से कोर्ट में पेश की गई दो हिस्सों की विस्तृत रिपोर्ट में बेंगलुरु के पीजी आवासों की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर पीजी बुनियादी नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं:

  • नियमों के विरुद्ध निर्माण: अधिकांश पीजी बिना किसी स्वीकृत नक्शे (Sanctioned Plan) के बनाए गए हैं या फिर स्वीकृत ब्लूप्रिंट का पूरी तरह उल्लंघन करके खड़े किए गए हैं। इसके अलावा, पूरी तरह से रिहायशी (Residential) इलाकों में अवैध रूप से व्यावसायिक पीजी चलाए जा रहे हैं।
  • हद से ज्यादा भीड़भाड़: कई पीजी में रहने वाले लोगों को नियमों के अनुसार तय न्यूनतम जगह भी नहीं दी जा रही थी। कमरों में क्षमता से अधिक लोगों को रखा गया है, जिससे वहां रहना बेहद मुश्किल है।
  • फायर सेफ्टी और तकनीकी खामियां: ज्यादातर ठिकानों पर आग बुझाने के उपकरण ही नहीं थे और न ही अग्निशमन विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया था। सुरक्षा के लिए जरूरी सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे।
  • अस्वच्छ भोजन और पेयजल: पीजी की रसोइयों में बेहद गंदगी पाई गई और उनके पास फूड सेफ्टी (FSSAI) का लाइसेंस भी नहीं था। रहने वालों को पीने का साफ पानी और प्राथमिक चिकित्सा (First-Aid Box) जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही थीं।
  • महिला सुरक्षा से खिलवाड़: महिला पीजी में सुरक्षा के इंतजाम बेहद लचर पाए गए, जिससे वहां रहने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा सीधे तौर पर खतरे में थी।
  • लाइसेंस और कचरा प्रबंधन का अभाव: अधिकांश पीजी बिना वैध ट्रेड लाइसेंस के चल रहे थे और वे कचरा निपटान के नियमों का पालन भी नहीं कर रहे थे।
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हाई कोर्ट का सख्त रुख और समय सीमा

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूरज गोविंदराज ने माना कि बेंगलुरु आने वाले छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए पीजी सेवाएं बेहद जरूरी हैं। लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जनहित की आड़ में सुरक्षा नियमों की अनदेखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पीजी एसोसिएशन और अन्य याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ताओं राजेश भट और पवन जी एन ने कोर्ट से कमियों को ठीक करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा।

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अदालत ने कहा कि हालांकि इस मामले में किसी भी तरह की ढील देने की जरूरत नहीं है, फिर भी कोर्ट संचालकों को दो सप्ताह का समय दे रहा है। इस अवधि में सभी पीजी मालिकों को व्यक्तिगत तौर पर हलफनामा (Affidavit) देकर यह बताना होगा कि वे कब तक और कैसे इन कमियों को दूर करेंगे।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक हलफनामा पेश किया जाता है, तो सुधार के लिए 45 से 60 दिनों का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। लेकिन अगर इस समय सीमा के भीतर भी नियमों का पालन नहीं किया गया, तो बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) और बेस्कॉम (BESCOM) को तुरंत पानी और बिजली के कनेक्शन काटने का आदेश दिया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी।

पीजी ट्रेड लाइसेंस के लिए ये हैं 10 अनिवार्य नियम

बीबीएमपी (BBMP) मुख्य आयुक्त द्वारा 7 अगस्त 2024 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी पीजी को ट्रेड लाइसेंस प्राप्त करने और उसे बनाए रखने के लिए निम्नलिखित 10 शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:

  1. सीसीटीवी निगरानी: सभी प्रवेश द्वारों, निकास द्वारों और गलियारों में सक्रिय सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए, जिनमें कम से कम 90 दिनों का रिकॉर्डिंग बैकअप रखने की क्षमता हो।
  2. प्रति व्यक्ति न्यूनतम स्थान: पीजी में रह रहे हर व्यक्ति के हिस्से में कम से कम 70 वर्ग फुट की जगह आनी चाहिए। लाइसेंस में पीजी की अधिकतम क्षमता साफ तौर पर दर्ज होनी चाहिए।
  3. स्वच्छता: निवासियों के लिए साफ-सुथरे और स्वच्छ शौचालय होने चाहिए।
  4. पेयजल और पानी की आपूर्ति: पीने योग्य साफ पानी की गारंटी के साथ-साथ प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर (LPCD) पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
  5. खाद्य सुरक्षा: यदि पीजी में खुद की बड़ी रसोई (Mass Kitchen) है, तो ट्रेड लाइसेंस मिलने के 3 महीने के भीतर FSSAI लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
  6. 24/7 सुरक्षा गार्ड: पीजी परिसर में कम से कम एक ऐसा सुरक्षा गार्ड चौबीसों घंटे तैनात होना चाहिए, जिसके चरित्र का पुलिस सत्यापन हो चुका हो।
  7. फायर क्लीयरेंस: ट्रेड लाइसेंस जारी होने से पहले सक्षम प्राधिकारी से आधिकारिक फायर सुरक्षा क्लीयरेंस लेना अनिवार्य है।
  8. इमरजेंसी हेल्पलाइन: आपातकालीन स्थिति के लिए बीबीएमपी और स्थानीय पुलिस के हेल्पलाइन नंबरों को परिसर में प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
  9. प्राथमिक चिकित्सा: हर समय परिसर में एक पूरी तरह से सुसज्जित फर्स्ट-एड किट उपलब्ध होनी चाहिए।
  10. कचरा प्रबंधन: पीजी परिसरों को सूखे और गीले कचरे के अलगाव (Solid Waste Segregation) के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
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इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जोनल कमिश्नरों को हर छह महीने में पीजी का निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बीबीएमपी एक्ट 2020 की धारा 307 और 308 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जीबीए ने यह भी साफ किया है कि जल्द ही शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसा ही सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।

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