कैसरबाग सिविल कोर्ट परिसर के आसपास अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो का गंभीर संज्ञान लिया है, जिनमें वकीलों के बीच लाठियां बांटी जा रही थीं। अदालत ने इस हरकत पर नाराजगी जताते हुए वकीलों को आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी है।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणियां ‘अनुराधा सिंह व अन्य’ नामक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान कीं। यह याचिका कैसरबाग कोर्ट परिसर के पास से अतिक्रमण हटाने के विरोध और समर्थन से जुड़े विवाद पर आधारित है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में पूछा:
“क्या आपको लगता है कि लाठियां बांटकर आप प्रशासन को उसकी कानूनी जिम्मेदारियां निभाने से रोक लेंगे?”
अदालत ने साफ किया कि इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, पिछले एक सप्ताह से जिला अदालत में न्यायिक काम पूरी तरह ठप रहने पर गहरी चिंता जताते हुए हाई कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद ‘गंभीर’ बताया।
विवाद की जड़: अतिक्रमण हटाओ अभियान बनाम वकीलों का विरोध
कैसरबाग इलाके में प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद स्थानीय वकीलों और प्रशासन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
अदालत ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि सड़क पर किए गए अवैध कब्जों के कारण अक्सर आपातकालीन वाहन और एम्बुलेंस जाम में फंस जाते हैं। कोर्ट ने एक दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि पूर्व में एक मरीज की मौत सिर्फ इसलिए हो गई थी क्योंकि एम्बुलेंस जाम से बाहर नहीं निकल सकी थी।
दूसरी ओर, इस अभियान का विरोध कर रहे वकीलों का कहना है कि नगर निगम ने बिना किसी उचित पहचान या बिना नाप-जोख किए ही तोड़फोड़ की कार्रवाई की है। उन्होंने दलील दी कि अभियान के दौरान एक फोटोकॉपी की दुकान को भी ढहा दिया गया, जबकि उस दुकान का किराया सीधे जिला अदालत को जाता था।
नुकसान की भरपाई और चैंबर आवंटन का आश्वासन
वकीलों की शिकायतों पर रुख स्पष्ट करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वह फोटोकॉपी दुकान के मामले से पूरी तरह वाकिफ है।
बेंच ने स्पष्ट किया कि उक्त दुकान को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान अनजाने में नुकसान पहुंचा था। इसकी भरपाई के लिए प्रभावित दुकानदार को उसी स्थान पर दूसरी दुकान आवंटित कर दी गई है और उसके वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके अलावा, वकीलों के बैठने की जगह की समस्या को सुलझाते हुए कोर्ट ने बताया कि कैसरबाग में वकीलों के चैंबर आवंटन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। इस संबंध में स्थानीय बार एसोसिएशनों को पहले ही औपचारिक रूप से सूचित किया जा चुका है।

