जनगणना ड्यूटी से प्राइवेट स्कूल स्टाफ को बड़ी राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DIOS के आदेश पर लगाई रोक

निजी स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सहायता प्राप्त (aided) और गैर-सहायता प्राप्त (unaided) निजी शिक्षण संस्थानों के स्टाफ को जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी भी काम के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ ही, हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के उस आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसमें उन्होंने जनगणना कार्यों के लिए निजी स्कूलों से उनके पूरे स्टाफ की सूची मांगी थी।

21 मई को दिया गया यह न्यायिक आदेश सोमवार को सामने आया, जिसे प्रशासनिक हस्तक्षेप के खिलाफ निजी शैक्षणिक संस्थानों की एक बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

कोर्ट की दोटूक टिप्पणी: ‘लोकल अथॉरिटी’ नहीं हैं निजी स्कूल

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने पाया कि निजी शिक्षण संस्थान कानूनी रूप से उन संगठनों की श्रेणी में नहीं आते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय जनगणना कार्य में मदद करना अनिवार्य है।

जस्टिस नंदन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

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“कोर्ट का प्रथम दृष्टया मानना है कि निजी संस्थानों के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी, चाहे वे सहायता प्राप्त हों या गैर-सहायता प्राप्त, ‘स्थानीय अधिकारियों’ (जैसे B.S.A., D.I.O.S. और D.P.R.O.) के दायरे में नहीं आते हैं। केवल इन्हीं अधिकारियों को अपने कर्मचारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता होती है, जैसा कि दिनांक 01.04.2026 के पत्र में भी कहा गया है।”

कोर्ट ने आगे जोड़ा कि 8 अप्रैल 2026 के पत्र के अनुपालन में बेसिक शिक्षा अधिकारी (B.S.A.) द्वारा चार्ज ऑफिसर को भेजी गई सूची के आलोक में, निजी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी भी कार्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

क्यों एसोसिएशन को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा?

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब गौतम बुद्ध नगर के DIOS ने एक आदेश जारी कर सभी निजी स्कूलों के प्राचार्यों और प्रबंधन को अपने कर्मचारियों की सूची सौंपने का निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ ‘इंडिपेंडेंट सेल्फ फाइनेंस्ड स्कूल्स एसोसिएशन’ (Independent Self Financed Schools Association) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि:

  • जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4A के तहत केवल “स्थानीय अधिकारियों” (local authorities) को ही आधिकारिक निर्देश मिलने पर जनगणना कार्य के लिए स्टाफ उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
  • निजी स्कूल किसी भी तरह से सरकारी नियंत्रण में नहीं हैं और न ही वे सरकार की सहायक इकाइयाँ हैं। इसलिए, उन्हें कानूनी रूप से ‘लोकल अथॉरिटी’ नहीं माना जा सकता और न ही उन पर यह प्रशासनिक दायित्व थोपा जा सकता है।
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अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के इस रोक (Stay) के आदेश के बाद, गौतम बुद्ध नगर में निजी स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों को जबरन जनगणना ड्यूटी पर लगाए जाने की कोशिशों पर फिलहाल पूरी तरह विराम लग गया है।

अदालत ने इस कानूनी विवाद के स्थायी समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा (counter-affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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