सुप्रीम कोर्ट में याचिका: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और फर्जी वकीलों की जांच की मांग, अदालती टिप्पणियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट में एक अनोखी याचिका दायर की गई है, जिसमें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे व्यंग्यात्मक ग्रुप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की जांच और फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वाले वकीलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

इस याचिका में अदालती सुनवाई के दौरान जजों द्वारा की जाने वाली मौखिक टिप्पणियों (oral observations) के व्यावसायिक दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन टिप्पणियों को अदालत से बाहर प्रचार अभियानों और डिजिटल रीच बढ़ाने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

फर्जी डिग्री और अदालती टिप्पणियों के दुरुपयोग पर निशाना

याचिका में देश की कानूनी प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले दो बड़े मुद्दों को उठाया गया है: पहला, बिना वैध योग्यता के अदालत में पैरवी करने वाले लोग और दूसरा, अदालती कार्यवाही का व्यावसायिक इस्तेमाल।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि फर्जी डिग्री का उपयोग कर वकालत करने वाले तथाकथित वकीलों की पहचान के लिए एक विस्तृत जांच कराई जाए। इसके साथ ही, याचिका में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि कैसे अदालती कार्यवाही के अंशों का इस्तेमाल अदालत के बाहर व्यक्तिगत या व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है। याचिका के अनुसार, जजों की मौखिक टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने और प्रचार पाने के लिए तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है।

क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का पूरा विवाद?

इस पूरे मामले के केंद्र में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक डिजिटल ग्रुप है, जो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है।

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दरअसल, इस ग्रुप की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के बाद हुई थी। 15 मई को एक वकील को ‘सीनियर’ का दर्जा देने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा में आई थी। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि सुनवाई के दौरान सीजेआई ने “कॉकरोच” (तिलचिट्टे) और “परजीवी” (parasites) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी वायरल हो गई और व्यंग्य के रूप में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का डिजिटल ग्रुप अस्तित्व में आ गया।

मुख्य न्यायाधीश ने दी थी सफाई: “मेरी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया”

सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद और तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच, 16 मई को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले पर बेहद कड़ा स्पष्टीकरण जारी किया था। उन्होंने कहा था कि वह उन मीडिया रिपोर्टों से बेहद “आहत” हैं, जिनमें यह दिखाया गया कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की थी।

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सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि उनकी 15 मई की टिप्पणी केवल उन लोगों के खिलाफ थी जो “फर्जी और फर्जी डिग्री” के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी अदालत के भीतर दी गई व्यवस्था और संदर्भ को समझे बिना उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया।

अब इस नई याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि वह न केवल कानूनी पेशे में फर्जी डिग्री धारकों पर नकेल कसे, बल्कि डिजिटल दुनिया में अदालती टिप्पणियों के जरिए फैलाई जा रही सनसनी और फर्जी प्रचार पर भी लगाम लगाए।

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