राघव चड्ढा को झटका: दिल्ली हाई कोर्ट का सोशल मीडिया पोस्ट पर तुरंत रोक से इनकार; कहा- राजनीतिक फैसले की आलोचना ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ का उल्लंघन नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) सांसद राघव चड्ढा को उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर की जा रही पोस्ट पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि राजनीतिक निर्णयों की आलोचना को व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जा सकता। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने मामले में अंतरिम राहत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

क्या है पूरा विवाद?

यह कानूनी विवाद राघव चड्ढा के हालिया राजनीतिक कदम के बाद शुरू हुआ। इसी साल अप्रैल में चड्ढा ने ‘आप’ से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। उनके साथ ‘आप’ के छह अन्य राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हुए थे।

इस राजनीतिक बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर चड्ढा को तीखी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कई प्लेटफॉर्म्स पर उन पर “पैसे के लिए बिकने” के आरोप लगाए गए। इन आरोपों और उनके चेहरे का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे कथित एआई-जनरेटेड (AI-generated) व डीपफेक कंटेंट पर आपत्ति जताते हुए चड्ढा ने हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने इसे अपने व्यक्तित्व अधिकारों का हनन बताते हुए इन पोस्ट्स को हटाने की मांग की थी।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

राघव चड्ढा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कोर्ट से इन पोस्टों पर तुरंत रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने दलील दी कि आलोचना की भी एक सीमा होती है।

नायर ने कोर्ट के समक्ष कहा, “यह कहानी फैलाई जा रही है कि मैंने पैसे लेकर सौदा किया है। इसे किसी भी सूरत में महज राजनीतिक आलोचना नहीं माना जा सकता।”

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चड्ढा के वकील ने यह भी तर्क दिया कि उनकी तस्वीरों और डीपफेक तकनीक का अनधिकृत इस्तेमाल कर उनके व्यक्तित्व अधिकारों को निशाना बनाया जा रहा है।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘मानहानि का मामला बनता है, पर्सनैलिटी राइट्स का नहीं’

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद चड्ढा के इन तर्कों से सहमत नजर नहीं आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक क्षेत्र में लिए गए निर्णयों पर जनता की प्रतिक्रिया को व्यक्तित्व अधिकारों के व्यावसायिक उपयोग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

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जस्टिस प्रसाद ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:

“यह केवल आपके राजनीतिक फैसलों पर की गई आलोचना है… प्रथम दृष्टया यह एक राजनीतिक निर्णय पर हमला या समीक्षा मात्र है।”

अदालत ने ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ के व्यावसायिक इस्तेमाल और सार्वजनिक आलोचना के बीच की कानूनी लक्ष्मण रेखा को स्पष्ट करते हुए कहा:

“किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व अधिकारों के व्यावसायिक इस्तेमाल (Commercialisation) और उसकी आलोचना किए जाने में एक बड़ा अंतर होता है।”

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि अगर पैसे लेने के आरोपों से चड्ढा की छवि धूमिल हो रही है, तो इसके लिए सही कानूनी उपाय ‘मानहानि कानून’ के तहत आता है, न कि व्यक्तित्व अधिकारों के तहत।

फैसला सुरक्षित; अदालत में बढ़ रहा है ऐसे मामलों का चलन

फिलहाल हाई कोर्ट ने इन विवादित सोशल मीडिया पोस्टों को तुरंत हटाने या उन पर प्रतिबंध लगाने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है। कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी डिजिटल पहचान और छवि की सुरक्षा के लिए याचिकाएं दायर करने का चलन तेजी से बढ़ा है। राघव चड्ढा से पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर, कई नामी खेल हस्तियां और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी अपनी तस्वीरों, आवाज और व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का रुख कर चुके हैं।

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