कर्नाटक के लाखों दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी संगठनों की संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) को बुधवार सुबह 6:00 बजे से प्रस्तावित अपनी राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने से रोक दिया है।
हाईकोर्ट की अवकाश पीठ, जिसमें जस्टिस सूरज गोविंदराज और जस्टिस के मनमथ राव शामिल हैं, ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट का यह दखल आम लोगों, विशेषकर रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों और कामकाजी वर्ग को ध्यान में रखते हुए आया है।
आम नागरिकों की याचिका पर कोर्ट ने जताया सरोकार
यह याचिका किसी बड़े संगठन ने नहीं, बल्कि एक घरेलू सहायिका सी वेदावती और एक निर्माण मजदूर श्रीधरा एचवी की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम हुइलगोल ने दलील दी कि अचानक सरकारी बसों का चक्का जाम होने से उन अनगिनत लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा जो पूरी तरह से इन सरकारी बसों पर निर्भर हैं।
सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कर्मचारी यूनियनों से हड़ताल पर न जाने की अपील की। कोर्ट ने कहा, “जब पहले ही 12.5 प्रतिशत की वेतन वृद्धि दी जा चुकी है, तो हड़ताल पर न जाएं।”
अपने लिखित अंतरिम आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा: “प्रतिवादी नंबर 7 (संयुक्त कार्रवाई समिति) और उससे जुड़ी यूनियनों को हड़ताल पर जाने और 29 अप्रैल 2026 के हड़ताल नोटिस पर अमल करने से रोका जाता है।”
इस गतिरोध को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सरकारी वकील (AGA) को दो दिन का समय दिया है ताकि वे सरकार से निर्देश लेकर यह बता सकें कि कर्मचारी संघों, परिवहन मंत्री या मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के सचिवों के बीच एक औपचारिक बैठक कब आयोजित की जा सकती है।
वेतन वृद्धि और बकाये को लेकर क्यों अड़ी हैं यूनियनें?
परिवहन कर्मचारियों और सरकार के बीच यह विवाद लंबे समय से चल रहा है। इस साल की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने अप्रैल से लागू होने वाली 12.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा की थी, लेकिन यूनियनें इसे पर्याप्त नहीं मान रही हैं।
कर्मचारी संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- 1 जनवरी 2024 से पूर्वव्यापी प्रभाव (retroactive effect) के साथ 25 प्रतिशत की वेतन वृद्धि दी जाए।
- कोविड-19 महामारी के दौरान काटे गए वेतन सहित कर्मचारियों के सभी लंबित बकाये का तत्काल भुगतान किया जाए।
अखिला कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन कर्मचारी महासंघ के महासचिव बी जयदेवराजे उर्स ने कहा कि सरकार की ओर से मांगें पूरी करने का आश्वासन दिए जाने के बाद कर्मचारियों ने पूरे 28 महीने सब्र किया है।
सोमवार को सरकार और विभिन्न राज्य परिवहन निगमों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध और बढ़ गया था। हालांकि, कर्मचारी समिति का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता क्लिफ्टन डी रोजारियो ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। उन्होंने कहा, “हमारे हितों की रक्षा की जानी चाहिए, हमारी मांगें अवास्तविक नहीं हैं। हम चाहते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री हमारे साथ बैठक करें और इन मुद्दों का समाधान निकालें।”
सरकार का कड़ा रुख; कड़ाई से लागू होगा ‘एस्मा’
दूसरी तरफ, राज्य सरकार के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि सरकार ने कर्मचारियों को 12.5% की बढ़ोतरी देकर और पिछला सारा बकाया चुकाकर पहले ही अपनी नेकनियती साबित कर दी है।
हड़ताल के कारण पैदा होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के प्रबंध निदेशक अकरम पाशा ने पुष्टि की है कि सार्वजनिक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य में एस्मा (ESMA – आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून) लागू कर दिया गया है। पाशा ने चेतावनी दी कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने या इस अवैध हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले पर अब अगली सुनवाई गुरुवार को होगी, जहां कोर्ट दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत की प्रगति की समीक्षा करेगा।

