तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज पुलिस प्राथमिकी (FIR) को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला पिछले महीने एक चुनावी रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेताओं के खिलाफ की गई उनकी कथित विवादित टिप्पणी से जुड़ा है।
सोमवार को दायर की गई इस याचिका पर जल्द ही सुनवाई होने की उम्मीद है। वरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने पुष्टि की है कि इस मामले पर इसी सप्ताह जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष सुनवाई हो सकती है।
क्या है पूरा विवाद और चुनावी रैली का भाषण?
यह कानूनी विवाद कोलकाता में 7 अप्रैल को आयोजित एक चुनावी रैली के बाद शुरू हुआ। अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने रैली के मंच से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अन्य नेताओं को सीधे तौर पर धमकी दी थी।
राजीव सरकार नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, टीएमसी सांसद ने मंच से कहा था, “मैं देखूंगा कि 4 मई को उन्हें बचाने कौन आता है। मैं देखूंगा कि दिल्ली का कौन सा गॉडफादर उन्हें बचाने आता है।”
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बनर्जी ने गृह मंत्री को चुनौती देते हुए कहा था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद वे केंद्रीय सुरक्षा बलों के बिना जनता का सामना करके दिखाएं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया था कि भाजपा ने जो ‘खेल’ शुरू किया है, तृणमूल कांग्रेस उसे खत्म करके रहेगी।
इस मामले पर शिकायतकर्ता राजीव सरकार का कहना है, “यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है। किसी भी राजनीतिक नेता द्वारा दूसरे नेता के खिलाफ ऐसी अमर्यादित भाषा और धमकियों का इस्तेमाल बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”
पुलिस जांच और शिकायत का घटनाक्रम
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले 5 मई को बागुईआटी थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी। हालांकि, वहां के अधिकारियों ने उन्हें साइबर क्राइम सेल जाने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने उसी दिन (5 मई को) बिधाननगर साइबर क्राइम विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी दर्ज की।
इन गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में दर्ज हुआ केस
बिधाननगर पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और चुनाव कानूनों के तहत बेहद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
- BNS धारा 196: समाज में दुश्मनी और नफरत फैलाना (यह एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है)।
- BNS धारा 351: आपराधिक धमकी देना।
- BNS धारा 353(1)(c): नफरत भड़काने के उद्देश्य से झूठी अफवाहें या सूचनाएं प्रसारित करना।
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (धारा 123(2) और 125): चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन और चुनावी अपराधों से जुड़ी धाराएं।
अब जब मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच चुका है, तो राजनीतिक और कानूनी गलियारों की नजरें जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ पर टिकी हैं कि कोर्ट टीएमसी नेता की इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है।

