ओडिशा में ईंधन की कमी की आशंका और पेट्रोल पंपों पर उमड़ती भीड़ के बीच, उड़ीसा हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने एक अनूठी और प्रेरक मिसाल पेश की है। सोमवार को हाई कोर्ट के तीन सिटिंग जजों ने अपनी सरकारी गाड़ियां छोड़ दीं और साइकिल पर सवार होकर अदालत पहुंचे। इस प्रतीकात्मक कदम के जरिए उन्होंने जनता को ईंधन संरक्षण और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का एक मूक लेकिन बेहद ताकतवर संदेश दिया है।
इस अनूठी पहल में जस्टिस सावित्री राथो, जस्टिस वी नरसिंह और जस्टिस सिबो शंकर मिश्रा शामिल थे। इन तीनों न्यायाधीशों ने ज्यूडिशियल एकेडमी (न्यायिक अकादमी) से हाई कोर्ट परिसर तक की करीब एक किलोमीटर से थोड़ी कम दूरी साइकिल से तय की। इस अनोखे नजारे को देखने के लिए रास्ते में वकीलों, कोर्ट स्टाफ और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
हालांकि, जजों ने इस यात्रा को लेकर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन उनके इस कदम को आम जनता से ईंधन का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की एक मूक अपील के तौर पर देखा जा रहा है।
अफवाहों और घबराहट के बीच ‘कूल’ संदेश
जजों की यह साइकिल यात्रा ऐसे समय में सामने आई है जब ओडिशा में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर जनता में भारी घबराहट (Panic) देखी जा रही है।
हाल के दिनों में अफवाहों और आशंकाओं के चलते राज्य के पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। हालांकि, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और राज्य सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सुचारू है। आधिकारिक एजेंसियों ने लोगों से ईंधन की जमाखोरी न करने और पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ लगाने से बचने की अपील की है। ऐसे माहौल में, माननीय न्यायाधीशों का सड़क पर उतरकर साइकिल चलाना लोगों को घबराहट छोड़कर संयम बरतने का एक सीधा और प्रभावी संदेश देता है।
सरकार के बचत अभियान को मिला न्यायिक समर्थन
हाई कोर्ट के न्यायाधीशों का यह कदम राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ईंधन बचाने के लिए किए जा रहे प्रशासनिक प्रयासों के बिल्कुल अनुकूल है।
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर असर पड़ने की आशंका के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जिम्मेदारी से ईंधन का उपभोग करने की अपील की थी। इसी अपील के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी हाल ही में अपने आधिकारिक काफिले (Convoy) की गाड़ियों की संख्या को घटाकर लगभग आधा कर दिया था।
इसके साथ ही, राज्य के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने भी अपने कर्मचारियों के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसमें सलाह दी गई है कि:
- कर्मचारी वाहन साझा करने (कारपूलिंग और राइड-शेयरिंग) को प्राथमिकता दें।
- दफ्तर के समय के दौरान निजी और छोटे कामों के लिए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल से बचें।
न्यायाधीशों के इस मौन प्रदर्शन ने इन प्रशासनिक सुधारों को और अधिक मजबूती दी है। इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि संकट के समय में ईंधन बचाने की जिम्मेदारी शासन के सभी अंगों की है।

