हरियाणा के गुरुग्राम (शिकोहपुर) जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी कानूनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वाड्रा ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी उस याचिका को बिना शर्त वापस ले लिया, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा खुद को जारी किए गए समन को चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज जैन ने इस फैसले को अपने आदेश में दर्ज किया। अदालत को सूचित किया गया कि याचिकाकर्ता अब इस मामले को हाई कोर्ट में आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।
जस्टिस मनोज जैन ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता के विद्वान वकील ने शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि उनके निर्देशों के अनुसार, याचिकाकर्ता इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं और वे इसे बिना शर्त वापस लेना चाहते हैं।” इसके बाद अदालत ने सभी पक्षों के अधिकारों और तर्कों को खुला रखते हुए इस याचिका को निपटा दिया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा अब इस मामले को लेकर वापस ट्रायल कोर्ट का रुख करेंगे। उनके वकील ने स्पष्ट किया कि वे हाई कोर्ट में इस चुनौती को आगे बढ़ाने के बजाय “उचित समय” पर ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपनी “उचित दलीलें” पेश करेंगे।
वाड्रा का यह कदम प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पिछले सप्ताह दर्ज किए गए कड़े विरोध के बाद आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने वाड्रा की याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए दावा किया था कि उनका कानूनी बचाव पूरी तरह से “कानून की गलत व्याख्या” पर आधारित है।
इस कानूनी विवाद के केंद्र में रॉबर्ट वाड्रा के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें थीं। सिंघवी ने अदालत में तर्क दिया था कि ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार (क्षेत्राधिकार) नहीं है। उनका तर्क था कि आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जो मुख्य आरोप लगाए गए हैं, वे 2008 से 2012 के बीच के हैं। उस समय ये अपराध मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के दायरे में नहीं आते थे। सिंघवी के अनुसार, इन अपराधों को बाद में क्रमशः 2013 और 2018 में पीएमएलए की सूची में शामिल किया गया।
दूसरी तरफ, ईडी ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। एजेंसी ने इसे “कानून का सरासर गलत और भ्रामक बयान” करार दिया, जिसके बाद सोमवार को वाड्रा की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला आया।
रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब 15 अप्रैल 2026 को स्पेशल जज सुशांत चांगोत्रा की ट्रायल कोर्ट ने ईडी द्वारा जुलाई 2025 में दाखिल की गई पहली चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया। अदालत ने दस्तावेजों की शुरुआती समीक्षा के बाद माना था कि वाड्रा और अन्य आठ सह-आरोपियों के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने के लिए “पर्याप्त आधार” मौजूद हैं।
विशेष न्यायाधीश चांगोत्रा ने अपने आदेश में कहा था, “दस्तावेजों को देखने से प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ मामला बनता है। इसलिए, मैं पीएमएलए की धारा 3 (मनी लॉन्ड्रिंग) और धारा 70 (कंपनियों द्वारा किए गए अपराध) के तहत अपराधों पर संज्ञान लेता हूं, जो कानून की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।” इसी आदेश के तहत वाड्रा और अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया था।
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में दाखिल की गई यह चार्जशीट 57 वर्षीय रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ किसी भी जांच एजेंसी द्वारा दायर की गई पहली औपचारिक आपराधिक चार्जशीट थी। इससे पहले, अप्रैल 2025 में ईडी ने उनसे लगातार तीन दिनों तक गहन पूछताछ की थी।
इस पूरे मामले की जड़ें फरवरी 2008 में हुए एक रियल एस्टेट सौदे से जुड़ी हैं, जो गुरुग्राम (हरियाणा) के मानेसर-शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) इलाके में हुआ था।
उस समय हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। रॉबर्ट वाड्रा की पूर्व डायरेक्टरशिप वाली कंपनी ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से शिकोहपुर में 3.5 एकड़ जमीन महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
इसके चार साल बाद, सितंबर 2012 में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने इसी जमीन को रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डीएलएफ (DLF) को भारी-भरकम मुनाफे के साथ 58 करोड़ रुपये में बेच दिया।
अक्टूबर 2012 में यह सौदा उस समय विवादों में घिर गया, जब हरियाणा के तत्कालीन महानिदेशक (भू-अभिलेख एवं चकबंदी) और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) को रद्द कर दिया। खेमका का कहना था कि यह सौदा राज्य के चकबंदी अधिनियम और तय प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करके किया गया था।
रॉबर्ट वाड्रा इस पूरे मामले में खुद को बेकसूर बताते आए हैं। उनका हमेशा से कहना रहा है कि यह पूरी जांच और कानूनी कार्रवाई उनके और उनके परिवार (जिसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल हैं) के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की जा रही है।
इस मामले में केवल रॉबर्ट वाड्रा ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोग और कंपनियां भी रडार पर हैं। अदालत द्वारा जिन अन्य आरोपियों को समन जारी किया गया है, उनमें केवल सिंह विर्क, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (अब स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी), स्काईलाइट रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, रियल अर्थ एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (अब रियल अर्थ एस्टेट्स एलएलपी) और ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (अब ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग एलएलपी) शामिल हैं।

