इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजधानी के वार्ड संख्या 73 (फैजुल्लागंज) से निर्वाचित पार्षद के शपथ ग्रहण में हो रही पांच महीने की देरी पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई, तो लखनऊ की मेयर, जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा।
यह मामला लखनऊ के फैजुल्लागंज वार्ड का है, जहां लगभग पांच महीने पहले एक चुनाव न्यायाधिकरण (Election Tribunal) ने ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित किया था। हालांकि, चुनाव जीतने के बावजूद प्रशासन द्वारा उन्हें अब तक पद की शपथ नहीं दिलाई गई है। इसी प्रशासनिक ढिलाई के खिलाफ तिवारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह संवैधानिक और कानूनी आदेशों की अनदेखी का गंभीर मामला है।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त तो अदालत में पेश हुए, लेकिन मेयर और जिलाधिकारी ने उपस्थिति से छूट मांगी थी। मेयर की ओर से वकील ने छूट की अर्जी दी, जबकि डीएम ने छुट्टी पर होने का हवाला दिया।
अदालत ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया और अन्य वकील इस देरी के पीछे कोई ठोस या संतोषजनक कारण पेश नहीं कर पाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण के आदेश का पालन करना अनिवार्य है और इसे अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता।
पिछली सुनवाई (11 मई) में भी कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे, जिनका पालन न होने पर अब कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा:
- अगले सात दिनों के भीतर पार्षद ललित किशोर तिवारी का शपथ ग्रहण संपन्न कराया जाए।
- यदि इस आदेश का उल्लंघन होता है, तो मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने स्पष्टीकरण देना होगा।
यह आदेश उन प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक बड़ा संदेश है जो न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन में देरी करते हैं। अब सबकी नजरें 21 मई की तारीख पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस समय सीमा के भीतर शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी करता है या नहीं।

