रेणुकास्वामी मर्डर केस: ‘बेहद सुस्त है ट्रायल’, सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर दर्शन के मामले में कार्यवाही तेज करने के दिए निर्देश

कन्नड़ अभिनेता दर्शन थुगुदीपा और चर्चित रेणुकास्वामी हत्याकांड के अन्य आरोपियों के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। देश की शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले के ट्रायल की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु की एक निचली अदालत को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए और यदि आवश्यक हो, तो ‘डे-टू-डे’ (प्रतिदिन) आधार पर सुनवाई की जाए।

ट्रायल की रफ्तार पर ‘सुप्रीम’ नाराजगी

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने बेंगलुरु के सिविल और सत्र न्यायाधीश की रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद कहा कि कार्यवाही की वर्तमान गति “बेहद धीमी” है। अदालत ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि 3 नवंबर 2025 को आरोप तय किए जाने के बाद से पिछले सात महीनों में अभियोजन पक्ष केवल 10 गवाहों का ही परीक्षण कर पाया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, जो अभिनेता दर्शन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने अदालत को बताया कि अभियोजन पक्ष कुल 272 गवाहों की जांच करना चाहता है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, “यदि इसी गति से सुनवाई चलती रही, तो 60 मुख्य गवाहों की गवाही पूरी होने में भी लंबा समय लग जाएगा।” कोर्ट ने निचली अदालत को आगाह किया कि सुनवाई को किसी भी “कमजोर आधार” (flimsy grounds) पर स्थगित न किया जाए।

एक साल की निगरानी और कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के लिए एक स्पष्ट समय सीमा और निगरानी तंत्र निर्धारित किया है। पीठ ने कहा कि वह अगले एक वर्ष तक ट्रायल की प्रगति का बारीकी से अवलोकन करेगी।

कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा, “एक साल के अंत में यदि ट्रायल में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई देती है, तो हम तदनुसार मामले पर विचार करेंगे।” इसके साथ ही, बचाव पक्ष को भी निर्देश दिया गया है कि वे गवाहों के परीक्षण में पूरा सहयोग करें ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

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जेल की सुविधाओं पर विवाद

ट्रायल के अलावा, अदालत ने जेल में दर्शन की रहने की स्थितियों पर भी संज्ञान लिया। दर्शन की कानूनी टीम ने दावा किया था कि उन्हें ‘क्वारंटीन सेल’ में रखा गया है और अन्य कैदियों से मिलने या बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने से रोका जा रहा है।

हालांकि, कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इन दावों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उस स्थान का नाम है जिसे महामारी के दौरान क्वारंटीन के लिए इस्तेमाल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दर्शन को एक विचाराधीन कैदी (undertrial) के रूप में मिलने वाली सभी जेल सुविधाएं प्रदान की जाएं।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला जून 2024 में 33 वर्षीय रेणुकास्वामी की नृशंस हत्या से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, अभिनेता के प्रशंसक रेणुकास्वामी ने कथित तौर पर अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा को अश्लील संदेश भेजे थे। इसके प्रतिशोध में दर्शन, पवित्रा और उनके साथियों पर रेणुकास्वामी का अपहरण करने और बेंगलुरु के एक शेड में तीन दिनों तक प्रताड़ित करने का आरोप है।

प्रताड़ना के बाद रेणुकास्वामी का शव एक नाले से बरामद किया गया था। इस मामले में दर्शन और पवित्रा गौड़ा फिलहाल हिरासत में हैं और शीर्ष अदालत ने पहले ही उनकी जमानत रद्द कर दी थी।

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