पिज्जा में मृत मधुमक्खी मिलने पर डोमिनोज़ को झटका, उपभोक्ता आयोग ने PGI वेलफेयर फंड में ₹10,000 जमा करने का दिया आदेश

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डोमिनोज़ पिज्जा इंडिया और जुबिलेंट फूड वर्क्स लिमिटेड को कथित तौर पर “अस्वच्छ खाद्य पदार्थ” परोसने का दोषी मानते हुए PGI गरीब मरीज कल्याण कोष में ₹10,000 जमा करने का निर्देश दिया है। हालांकि आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा उपभोक्ताओं को दिए गए ₹1 लाख मुआवजे को अत्यधिक मानते हुए उसे घटा दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति दया चौधरी (अध्यक्ष) और सदस्य सिमरजोत कौर की पीठ ने 6 मई को पारित किया। आयोग डोमिनोज़ और जुबिलेंट फूड वर्क्स द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मोहाली स्थित जिला उपभोक्ता आयोग के 5 जून 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

मामला 24 जून 2021 का है। शिकायतकर्ता गुरप्यार सिंह, जो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट समेत चंडीगढ़, पटियाला और संगरूर की अदालतों में प्रैक्टिस करते हैं, अपने एक परिचित के साथ डोमिनोज़ आउटलेट गए थे। वहां दोनों ने लगभग ₹1,060 का पिज्जा और सॉफ्ट ड्रिंक ऑर्डर किया।

शिकायत के अनुसार, खाना खाते समय एक पिज्जा में मृत मधुमक्खी दिखाई दी। शिकायतकर्ताओं ने तुरंत आउटलेट कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय मैनेजर ने उन्हें अन्य ग्राहकों के सामने आवाज ऊंची न करने को कहा और अभद्र व्यवहार किया।

शिकायत में यह भी कहा गया कि घटना के बाद एक ग्राहक की तबीयत बिगड़ गई और उसे पेट दर्द तथा उल्टी की शिकायत हुई, जिसके बाद उसे सेक्टर-16 स्थित सरकारी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, चंडीगढ़ में इलाज कराना पड़ा।

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बाद में शिकायतकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर भी इस घटना का उल्लेख किया। वहां डोमिनोज़ कस्टमर केयर ने “अप्रिय अनुभव” के लिए माफी मांगी और घटना से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

इसके बाद उपभोक्ताओं ने कानूनी नोटिस भेजकर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और ₹20 लाख हर्जाने की मांग की।

जिला उपभोक्ता आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के मद में ₹1 लाख देने का आदेश दिया था। इसी आदेश को डोमिनोज़ और जुबिलेंट फूड वर्क्स ने राज्य आयोग में चुनौती दी।

अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि शिकायत केवल अप्रमाणित तस्वीरों पर आधारित थी और किसी प्रयोगशाला जांच से यह साबित नहीं किया गया कि पिज्जा में वास्तव में कोई कीड़ा था। कंपनी ने कहा कि उसके आउटलेट्स में स्वच्छता के कड़े मानक लागू हैं, जिनमें पेस्ट कंट्रोल, कीट मारने वाली मशीनें और नियमित सफाई शामिल है।

कंपनी ने यह भी दलील दी कि पिज्जा लगभग 515 डिग्री फारेनहाइट तापमान पर पांच मिनट से अधिक समय तक बेक किया जाता है, इसलिए यदि कोई कीड़ा वास्तव में पिज्जा में होता तो उसका शरीर सुरक्षित नहीं रह सकता था।

साथ ही, कंपनी ने यह तर्क भी रखा कि उपभोक्ताओं ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 38(2)(c) के तहत खाद्य पदार्थ की लैब जांच नहीं कराई।

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हालांकि राज्य आयोग ने शिकायतकर्ताओं के पक्ष में पर्याप्त सामग्री होने की बात कही। आयोग ने पिज्जा की तस्वीरों, ऑर्डर स्लिप, मेडिकल रिकॉर्ड और डोमिनोज़ कस्टमर केयर के साथ हुई सोशल मीडिया बातचीत को महत्वपूर्ण माना।

आयोग ने कहा कि डोमिनोज़ के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जारी माफी इस बात का संकेत है कि घटना को लेकर कंपनी ने अपनी ओर से हुई चूक स्वीकार की थी। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में सफल रहे कि उन्हें अस्वच्छ पिज्जा परोसा गया था।

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फिर भी आयोग ने कहा कि ₹1 लाख का मुआवजा अत्यधिक था, क्योंकि पूरे ऑर्डर की कीमत करीब ₹1,000 ही थी। आदेश में कहा गया कि कंपनी को इस लापरवाही के लिए दंडित किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

संशोधित आदेश में आयोग ने निर्देश दिया कि ₹10,000 “डायरेक्टर PGI पुअर पेशेंट वेलफेयर फंड” में जमा कराए जाएं। साथ ही, अपील दायर करते समय कंपनी द्वारा जमा कराए गए ₹50,000 में से ₹10,000 उक्त फंड में ट्रांसफर किए जाएं और शेष राशि ब्याज सहित निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कंपनी को वापस कर दी जाए।

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