केंद्रीय राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे भगीरथ की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। यौन उत्पीड़न और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में राहत पाने के लिए भगीरथ ने मंगलवार को तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अदालत में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें एक अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए है और दूसरी उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग को लेकर है।
अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
यह कानूनी विवाद 8 मई को तब शुरू हुआ जब पेट बशीरबाद पुलिस स्टेशन में एक 17 वर्षीय नाबालिग की मां ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भगीरथ पिछले सात-आठ महीनों से उनकी बेटी के साथ संपर्क में थे और उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया।
वहीं, भगीरथ ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। अपनी सफाई में उन्होंने दावा किया कि वह खुद साजिश का शिकार हुए हैं। उनके अनुसार, नाबालिग लड़की और उसके माता-पिता उन्हें डरा-धमका रहे थे और उनसे जबरन वसूली (Extortion) की कोशिश की जा रही थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) सी.वी. आनंद को निर्देश दिए कि इस मामले की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाए और गहन तफ्तीश सुनिश्चित की जाए।
वर्तमान में जांच की कमान डीसीपी (कुकटपल्ली जोन) रीतिराज संभाल रही हैं। सोमवार को उन्होंने पुलिस स्टेशन का दौरा कर अब तक की प्रगति की समीक्षा की। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि जांच के लिए एक पुख्ता रणनीति तैयार कर ली गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता का प्रारंभिक बयान दर्ज कर लिया गया है, लेकिन कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य जुटाने के लिए इसे दोबारा दर्ज किया जाएगा।
फिलहाल, सभी की निगाहें हाई कोर्ट पर टिकी हैं, जहाँ भगीरथ की जमानत और केस को खत्म करने की याचिकाओं पर फैसला होना है।

