दहेज हत्या मामले में FIR रद्द करने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार; सतेंद्र कुमार अंतिल गाइडलाइंस के तहत जमानत पर विचार करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या और अन्य गंभीर आरोपों में नामजद एक व्यक्ति की FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, रिट याचिका का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी और जमानत के संबंध में ‘सतेंद्र कुमार अंतिल’ मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार विचार किया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता सद्दाम हुसैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका दायर कर 25 जुलाई 2025 को दर्ज हुई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को चुनौती दी थी। यह FIR महाराजगंज जिले के थाना निचलौल में Case Crime No. 0207/2025 के रूप में शिकायतकर्ता एनुद्दीन (प्रतिवादी संख्या 4) द्वारा दर्ज कराई गई थी।

याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-B (दहेज हत्या), 498-A (पति या रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पक्षों की दलीलें

जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चमन आरा और शबिस्ता परवीन पेश हुईं। शुरुआत में याचिकाकर्ता की वकील ने FIR की वैधता को चुनौती देते हुए दलीलें पेश कीं।

हालांकि, आदेश के अनुसार “कुछ बहस के बाद, याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता ने इस रिट याचिका के माध्यम से मांगी गई प्रार्थना को स्वेच्छा से छोड़ दिया।” इसके बजाय, वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि न्याय के हित में यह उचित होगा कि हाईकोर्ट निचली अदालत को सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानून के आलोक में जमानत अर्जी पर फैसला करने का निर्देश दे।

READ ALSO  यदि न्यायिक सेवा को प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए एक व्यवहार्य कैरियर विकल्प बनाना है, तो कामकाजी और सेवानिवृत्त अधिकारियों दोनों के लिए सेवा की शर्तों में सुधार किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

राज्य सरकार की ओर से पेश अपर सरकारी अधिवक्ता (A.G.A.) ने याचिकाकर्ता की इस संशोधित मांग का विरोध नहीं किया।

हाईकोर्ट का विश्लेषण और निर्णय

अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने और दलीलों पर विचार करने के बाद FIR रद्द करने की मुख्य प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया।

जमानत के संबंध में दिए गए वैकल्पिक अनुरोध पर विचार करते हुए बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दी गई दलीलों को स्वीकार किया और याचिका को विशेष निर्देशों के साथ निस्तारित कर दिया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा:

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने एशियन रिसर्फेसिंग मामले पर फैसला सुरक्षित रखा

“यह रिट याचिका अंततः इस निर्देश के साथ निस्तारित की जाती है कि यदि याचिकाकर्ता निचली अदालत के समक्ष उपस्थित होता है और जमानत के लिए आवेदन करता है, तो उसकी जमानत अर्जी पर संबंधित अदालत द्वारा सुप्रीम कोर्ट के ‘सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो और अन्य’ (2021) 10 SCC 773 के मामले में प्रतिपादित कानून के आलोक में निर्णय लिया जाएगा।”

गौरतलब है कि ‘सतेंद्र कुमार अंतिल’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपराधों की विभिन्न श्रेणियों और अनावश्यक गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत देने की प्रक्रियाओं पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।

READ ALSO  यूपीएससी धोखाधड़ी मामले में पूजा खेडकर को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम संरक्षण दिया

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले से चला आ रहा कोई भी अंतरिम आदेश अब समाप्त माना जाएगा।

केस विवरण

केस टाइटल: सद्दाम हुसैन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 3 अन्य
केस संख्या: क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका संख्या- 9582/2026
बेंच: जस्टिस राजीव मिश्रा, जस्टिस पदम नारायण मिश्रा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता: चमन आरा, शबिस्ता परवीन
प्रतिवादी के अधिवक्ता: जी.ए. (G.A.)
दिनांक: 6 मई, 2026

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles