तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट से पहले बड़ा झटका: 1 वोट से जीतने वाले TVK विधायक के वोटिंग अधिकार पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक

तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को होने वाले शक्ति परीक्षण (फ्लोर टेस्ट) से ठीक पहले एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति के वोटिंग अधिकारों पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है।

जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री के आर पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर याचिका पर दिया है।

इस पूरे मामले के केंद्र में 23 अप्रैल को आए चुनाव परिणाम हैं, जो राज्य के इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक रहे। तिरुपत्तूर सीट पर TVK के श्रीनिवास सेतुपति को 83,365 वोट मिले, जबकि DMK के दिग्गज नेता पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए।

महज एक वोट के अंतर से हारने के बाद पेरियाकरुप्पन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अपनी याचिका में उन्होंने वोटों की दोबारा गिनती (Recounting) की मांग की है। साथ ही, उन्होंने सेतुपति के विधायक के रूप में शपथ लेने पर भी रोक लगाने की अपील की थी, जिसे लेकर कोर्ट ने पिछले रविवार को एक विशेष सुनवाई भी की थी।

मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की कैबिनेट के शपथ ग्रहण के ठीक तीन दिन बाद, यानी बुधवार को सरकार का फ्लोर टेस्ट होना तय है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सेतुपति:

  • सरकार के विश्वास मत (Confidence Motion) में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
  • किसी भी संभावित अविश्वास प्रस्ताव में वोट नहीं डाल सकेंगे।
  • अगले आदेश तक सदन की किसी भी विधायी वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहेंगे।
READ ALSO  दिल्ली में ठोस अपशिष्ट निपटान पर सुप्रीम कोर्ट ने एमसीडी को फटकार लगाते हुए कहा कि 'स्थिति बहुत दयनीय' है।

17वीं विधानसभा के इस पहले बड़े शक्ति परीक्षण में एक विधायक का कम होना राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट का यह हस्तक्षेप न केवल चुनावी पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसने राज्य की नई सरकार के सामने एक नई चुनौती भी पेश कर दी है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles