उत्तर प्रदेश में जानलेवा ‘चाइनीज मांझे’ की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त नाराजगी जताई है। सोमवार को हुई एक अहम सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि इस जानलेवा धागे के प्रसार को रोकने के लिए उनके पास क्या ‘ठोस योजना’ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर प्रतिबंध लगा देना काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर इसका असर दिखना चाहिए।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने वकील एम. एल. यादव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग और पर्यावरण विभाग के सचिवों (या उनसे उच्च पदस्थ अधिकारियों) को अगली सुनवाई के लिए तलब किया है। इन अधिकारियों को 13 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
अदालत की सख्ती के जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि वह इस खतरनाक मांझे (नॉयलॉन और लेड-कोटेड) को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए एक विशिष्ट कानून बनाने की प्रक्रिया में है। सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि इस कानून का मसौदा तैयार करने और प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन पहले ही किया जा चुका है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील राजकुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पहले ही लेड-कोटेड और नायलॉन मांझे पर रोक लगा रखी है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं है। सरकार को उन निर्माण केंद्रों और बिक्री केंद्रों की पहचान कर जांच करनी चाहिए, जहां से यह अवैध कारोबार संचालित हो रहा है।
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब शहर के पतंग एसोसिएशन ने एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि मांझे के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन वैध व्यापारियों को परेशान कर रहा है।
इस पर हाई कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा:
- व्यापारियों के लिए: एसोसिएशन के सदस्यों को प्रतिबंधित मांझे को खत्म करने के सरकारी प्रयासों में पूर्ण सहयोग करना चाहिए।
- सरकार के लिए: प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि कार्रवाई केवल दोषियों के खिलाफ हो और किसी भी निर्दोष व्यक्ति का अनावश्यक उत्पीड़न न किया जाए।
अब सबकी नजरें 13 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को यह साबित करना होगा कि वह परिंदों और इंसानों के लिए ‘काल’ बने इस चाइनीज मांझे को रोकने के लिए कितनी तैयार है।

