साझा घर में रहने का अधिकार बुजुर्गों के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने बहू की बेदखली के आदेश को रखा बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बुजुर्ग सास-ससुर के घर से उनकी बहू और पोते को बेदखल करने के आदेश की पुष्टि की है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) के तहत ‘साझा घर’ (Shared Household) में रहने का कानूनी अधिकार कोई मालिकाना हक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस अधिकार का संतुलन बुजुर्ग नागरिकों के सम्मानपूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार के साथ बनाया जाना अनिवार्य है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता श्रीमती रितु तनेजा और उनके बेटे खुशाल तनेजा ने डिवीजनल कमिश्नर के 28 अगस्त, 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें सफदरजंग एन्क्लेव स्थित मकान खाली करने का निर्देश दिया गया था। यह संपत्ति याचिकाकर्ता के ससुर श्री ओम प्रकाश तनेजा और सास श्रीमती सावित्री तनेजा के नाम पर है।

फरवरी 2020 में रितु तनेजा के पति के निधन के बाद परिवार में विवाद बढ़ गया। बुजुर्गों ने ‘मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट, 2007’ के तहत दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए बेदखली की शिकायत दर्ज कराई थी। मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने शुरुआत में केवल ग्राउंड फ्लोर खाली करने का आदेश दिया था, लेकिन अपील पर डिवीजनल कमिश्नर ने पूरे घर से बेदखली का निर्देश दिया, क्योंकि दोनों पक्षों के संबंध इतने खराब हो चुके थे कि साथ रहना “पूरी तरह से असंभव” हो गया था।

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सुश्री मौली भट्टाचार्जी ने तर्क दिया कि यह मकान ‘साझा घर’ है और पति के निधन के बाद उन्हें कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली। उनका दावा था कि यह संपत्ति पैतृक व्यापार के पैसे से खरीदी गई थी, इसलिए इसमें उनके पति का हिस्सा था। उन्होंने सास-ससुर की सेवा करने की बात कहते हुए दुर्व्यवहार के आरोपों को नकारा।

वहीं, बुजुर्गों की ओर से वकील सुश्री अर्चना गौर ने कहा कि वे इस संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं और याचिकाकर्ता के आचरण के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता रितु तनेजा एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं और उनकी मासिक आय 1 लाख रुपये से अधिक है। इसके अलावा, उनके पास खिड़की एक्सटेंशन में वैकल्पिक आवास भी है। ससुर ने उदारता दिखाते हुए यह भी प्रस्ताव दिया कि यदि बहू घर खाली कर देती है, तो वे खिड़की एक्सटेंशन और फरीदाबाद के दो प्लॉट के दस्तावेज उसे सौंप देंगे।

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हाईकोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियां

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने जोर देकर कहा कि सीनियर सिटीजन एक्ट एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में गरिमा और सुरक्षा प्रदान करना है।

क्षेत्राधिकार की सीमा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत कार्यवाही संक्षिप्त (Summary) होती है और इसमें मालिकाना हक या पैतृक संपत्ति जैसे जटिल दीवानी विवादों का फैसला नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा:

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“यह पूरी तरह से स्थापित है कि सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत कार्यवाही को मालिकाना हक, सह-स्वामित्व, उत्तराधिकार या कथित पैतृक संपत्ति से संबंधित जटिल दीवानी विवादों के निर्धारण के मंच के रूप में नहीं बदला जा सकता है।”

अधिकारों का संतुलन ‘साझा घर’ के अधिकार पर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर और सतीश चंद्र आहूजा बनाम स्नेह आहूजा मामलों का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:

“निवास का अधिकार एक सुरक्षात्मक अधिकार है, न कि मालिकाना हक। इसका उपयोग बुजुर्गों के अपनी संपत्ति पर शांतिपूर्ण आनंद के वैध दावे को हराने के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थितियों में जहां साथ रहना पूरी तरह से असंभव हो गया हो, संतुलन बुजुर्ग नागरिकों के पक्ष में होना चाहिए।”

हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता कोई “असहाय या कमजोर” महिला नहीं है, बल्कि एक आर्थिक रूप से स्वतंत्र सरकारी कर्मचारी है।

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हाईकोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट ने डिवीजनल कमिश्नर के आदेश में किसी भी प्रकार की “अवैधता या मनमानी” नहीं पाई। हाईकोर्ट ने माना कि जब रिश्ते “अत्यधिक कड़वे” हो जाएं, तो बुजुर्गों की शांति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

प्रमुख निर्देश:

  1. बुजुर्ग सास-ससुर 30 दिनों के भीतर वैकल्पिक आवास (खिड़की एक्सटेंशन) और फरीदाबाद के प्लॉट के मूल दस्तावेज डिवीजनल कमिश्नर के पास जमा करेंगे।
  2. दस्तावेज जमा होने के 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं को मौजूदा घर खाली करना होगा।
  3. सक्षम कोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी पक्ष इन संपत्तियों में तीसरे पक्ष का अधिकार (Third-party rights) नहीं बनाएगा।

हाईकोर्ट ने बिना किसी लागत के रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

मामले का विवरण:

  • केस टाइटल: श्रीमती रितु तनेजा और अन्य बनाम दिल्ली सरकार और अन्य
  • केस नंबर: W.P.(C) 12721/2023 और CM APPL. 25845/2026
  • बेंच: जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव
  • तारीख: 08 मई, 2026

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