तमिलनाडु की राजनीति में तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यहां हार-जीत का फैसला महज एक वोट से हुआ है, जिसने अब कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने रविवार को तीन घंटे तक विशेष सुनवाई की।
अदालत अब इस बात पर विचार कर रही है कि क्या इतने मामूली अंतर से जीतने वाले उम्मीदवार के शपथ ग्रहण पर रोक लगाई जानी चाहिए।
शिवगंगा जिले की तिरुप्पत्तूर सीट पर 23 अप्रैल को हुए मतदान के नतीजे चौंकाने वाले रहे। टीवीके (TVK) के उम्मीदवार आर. श्रीनिवासा सेतुपति को कुल 83,365 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और पूर्व द्रमुक (DMK) मंत्री के. आर. पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए।
लोकतंत्र में जीत का यह सबसे छोटा संभव अंतर है। इसी एक वोट की हार ने पेरियाकरुप्पन को तत्काल कानूनी राहत के लिए हाई कोर्ट जाने पर मजबूर कर दिया।
न्यायमूर्ति एल. विक्टोरिया गौरी और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार की वेकेशन बेंच ने रविवार को इस याचिका पर विस्तार से सुनवाई की। पेरियाकरुप्पन ने अपनी याचिका में दो मुख्य मांगें रखी हैं:
- तिरुप्पत्तूर निर्वाचन क्षेत्र के वोटों की दोबारा व्यापक गिनती (Recounting) कराई जाए।
- जब तक विवाद का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक आर. श्रीनिवासा सेतुपति को विधायक के रूप में शपथ लेने से रोका जाए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने रविवार को छुट्टी के दिन भी करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
हाई कोर्ट ने अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी है। बेंच ने आयोग को सोमवार, 11 मई तक एक औपचारिक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में चुनाव आयोग को मतगणना प्रक्रिया और उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण देना होगा।
सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई बेहद अहम होगी, क्योंकि उसी दिन यह तय हो सकता है कि क्षेत्र में दोबारा गिनती होगी या निर्वाचित घोषित उम्मीदवार अपने पद की शपथ ले पाएंगे।

