इंजीनियर राशिद को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने बीमार पिता से मिलने के लिए दी 12 घंटे की मोहलत, AIIMS में होगी मुलाकात

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद बारामूला के सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ ​​इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत की शर्तों में बदलाव किया है। कोर्ट ने उन्हें एम्स (AIIMS) दिल्ली में भर्ती उनके बीमार पिता से रोजाना 12 घंटे मिलने की अनुमति दी है। संशोधित आदेश के अनुसार, राशिद सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक अपने पिता के साथ रह सकेंगे, जिसके बाद उन्हें वापस जेल जाना होगा। यह व्यवस्था 10 मई तक लागू रहेगी।

इंजीनियर राशिद को एनआईए (NIA) ने 2017 के टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। अक्टूबर 2019 में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। मार्च 2022 में एनआईए की विशेष अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, राजद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।

इससे पहले 28 अप्रैल को, हाईकोर्ट ने राशिद को उनके पिता से मिलने के लिए श्रीनगर जाने हेतु अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि, उनके पिता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी कारण राशिद ने कोर्ट से आदेश में संशोधन की मांग की थी ताकि वह दिल्ली में ही अपने पिता के साथ रह सकें।

सुनवाई के दौरान राशिद के वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि दिल्ली में उनका कोई रिश्तेदार नहीं है, इसलिए उन्होंने इस उद्देश्य के लिए एक कमरा किराए पर लिया है। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि राशिद को उस किराए के आवास या सांसद के रूप में उन्हें आवंटित फ्लैट में रुकने की अनुमति दी जाए।

एनआईए के वकील ने इन मांगों का कड़ा विरोध किया। एजेंसी का तर्क था कि चूंकि अब पिता दिल्ली में ही हैं, इसलिए आरोपी को किराए के घर में रहने की कोई जरूरत नहीं है। साथ ही, सांसद फ्लैट में रहने से अन्य सांसदों की सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो सकता है।

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एजेंसी ने राशिद द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। एनआईए ने दलील दी कि पुलिस की गैर-मौजूदगी में लंबे समय तक मोबाइल फोन पास होने से “कुछ भी संभव है”। जांच एजेंसी ने सुझाव दिया कि यदि उन्हें फोन करना है, तो वह अपने पिता या परिवार के किसी सदस्य का फोन इस्तेमाल कर सकते हैं।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने स्पष्ट किया कि 28 अप्रैल के आदेश का मुख्य उद्देश्य राशिद को उनके बीमार पिता के साथ समय बिताने का अवसर देना था।

बेंच ने कहा, “चूंकि अपीलकर्ता के पिता पहले से ही दिल्ली के एम्स में हैं और 28 अप्रैल के आदेश का इरादा अपीलकर्ता को अपने पिता के साथ समय बिताने की अनुमति देना था, इसलिए आदेश को इस हद तक संशोधित किया जाता है कि अपीलकर्ता को 10 मई तक रोजाना सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक अपने पिता से मिलने की अनुमति दी जाए।”

अदालत ने आवास के मुद्दे पर एनआईए की बात से सहमति जताई और कहा कि इतने कम समय में किराए के पते का सत्यापन (Verification) करना संभव नहीं है। साथ ही, सुरक्षा कारणों से सांसद फ्लैट में रहने की अनुमति भी नहीं दी गई।

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मोबाइल फोन के मुद्दे पर कोर्ट ने एनआईए की आपत्तियों को “अव्यावहारिक” बताते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि जेल से बाहर रहने के दौरान राशिद को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि राशिद को कस्टडी पैरोल (Custody Parole) के तहत रोजाना एम्स ले जाया जाए। आदेश की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

  • मुलाकात का समय: 10 मई तक रोजाना सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक।
  • सुरक्षा: सादे कपड़ों में कम से कम दो पुलिसकर्मी राशिद के साथ रहेंगे।
  • पुलिस की स्थिति: पुलिस अधिकारी एम्स में उनके पिता के वार्ड के बाहर तैनात रहेंगे।
  • रात की हिरासत: 12 घंटे की अवधि समाप्त होने के बाद, राशिद को वापस जेल में ही रहना होगा।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछली अंतरिम जमानत की अन्य सभी शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।

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