बॉम्बे हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के निदेशक आर. जी. सिंह को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों द्वारा न्यायिक आदेशों की जानबूझकर की जा रही अनदेखी और उनके “दुस्साहस” पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। यह मामला सीआईएसएफ (CISF) और बीएसएफ (BSF) में भर्ती से जुड़ा है, जहां कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद दो उम्मीदवारों को ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल नहीं किया गया।
यह विवाद पुणे के दो निवासियों, सुशांत सरोदे और अनिकेत जाधव द्वारा दायर याचिकाओं से शुरू हुआ। दोनों याचिकाकर्ता सीआईएसएफ और बीएसएफ के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होना चाहते थे। हालांकि, शारीरिक परीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया कि उनकी लंबाई निर्धारित सीमा के अनुरूप नहीं है।
मामले की समीक्षा के बाद, हाईकोर्ट ने पहले पाया था कि अधिकारियों द्वारा बताई गई लंबाई में अंतर “नगण्य” (minuscule) था। इसके आधार पर, कोर्ट ने आदेश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया जाए। इसके बावजूद उन्हें प्रशिक्षण में नहीं लिया गया, जिससे कोर्ट को दोबारा हस्तक्षेप करना पड़ा।
जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनगांवकर की खंडपीठ ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि एसएससी निदेशक ने न केवल आदेश का पालन नहीं किया, बल्कि निर्देश के बावजूद कोर्ट में पेश भी नहीं हुए।
अदालत ने सरकारी विभागों में आदेशों की अवहेलना की बढ़ती प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हम इस तथ्य से स्तब्ध हैं कि हाईकोर्ट के आदेशों की अवज्ञा करने की प्रवृत्ति इस हद तक बढ़ रही है कि हर साल सैकड़ों अवमानना याचिकाएं दर्ज की जा रही हैं।” कोर्ट ने नोट किया कि इनमें से अधिकांश याचिकाएं राज्य और केंद्र सरकारों या उनके अधिकारियों के खिलाफ दायर की जाती हैं।
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सरकारी अधिकारियों का अनुशासन ‘कानून की गरिमा’ (Majesty of Law) को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। अपनी तीखी आलोचना में पीठ ने इसे एक “क्लासिक केस” बताया, जहां देश की सेवा में लगे अधिकारियों ने न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने का “दुस्साहस” दिखाया है।
पीठ ने स्पष्ट किया, “ऐसे अधिकारियों का अनुशासन कानून की गरिमा का सम्मान करने में बहुत मायने रखता है।” उन्होंने कहा कि जानबूझकर की गई ऐसी अवज्ञा न्यायिक प्रणाली को कमजोर करती है।
हाईकोर्ट ने आर. जी. सिंह को अपने आचरण और आदेश के पालन न होने के कारणों को स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने की छूट दी है। इस मामले में अवमानना की कार्यवाही पर आगे के निर्णय के लिए अगली सुनवाई इस बुधवार को तय की गई है।

