सुप्रीम कोर्ट का इंद्राणी मुखर्जी को विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार; ट्रायल कोर्ट को चार सप्ताह में फैसला लेने का दिया निर्देश

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि मुखर्जी को इस तरह की राहत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उसके पिछले आदेशों में पहले ही उन्हें यह विकल्प दिया जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी प्रश्न यह था कि क्या शीर्ष अदालत को उस आरोपी को सीधे विदेश यात्रा की अनुमति देनी चाहिए जिसका ट्रायल अंतिम चरण में है, जबकि मामला ट्रायल कोर्ट में लंबित हो। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि इस तरह के आवेदनों पर पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा ही निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही, कोर्ट ने मुखर्जी को ट्रायल कोर्ट में नया आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता दी और मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को चार सप्ताह के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया।

पूर्व मीडिया कार्यकारी इंद्राणी मुखर्जी को उनकी बेटी शीना बोरा की हत्या का खुलासा होने के बाद अगस्त 2015 में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अप्रैल 2012 में मुंबई में एक कार के भीतर मुखर्जी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय ने कथित तौर पर शीना बोरा की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद रायगढ़ जिले के एक जंगल में शव को जला दिया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की जांच कर रही है, जिसमें साजिश के आरोप में मुखर्जी के पूर्व पति पीटर मुखर्जी को भी गिरफ्तार किया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने इंद्राणी मुखर्जी को छह साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बाद मई 2022 में जमानत दी थी। मुखर्जी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से हमेशा इनकार किया है।

विदेश यात्रा का मुद्दा पिछले एक साल से विवादों में रहा है। 19 जुलाई, 2024 को एक विशेष कोर्ट ने मुखर्जी को 10 दिनों के लिए स्पेन और यूनाइटेड किंगडम जाने की अनुमति दी थी। हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसने 27 सितंबर, 2024 को विशेष कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

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इससे पहले, 12 फरवरी, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने मुखर्जी की इसी तरह की एक याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि उनके वापस लौटने की कोई गारंटी नहीं है। साथ ही, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को एक साल के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुखर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने तर्क दिया कि हालांकि शीर्ष अदालत ने पिछले साल मेरिट के आधार पर फैसला नहीं लिया था, लेकिन अब उनकी विदेश यात्रा को लेकर कुछ जरूरी परिस्थितियां (Urgency) पैदा हो गई हैं।

हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि उसके पिछले हस्तक्षेप का दायरा क्या था। जजों ने कहा कि पिछले साल का आदेश याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट जाने में सक्षम बनाने के लिए था, न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने के लिए। पीठ ने कहा कि चूंकि ट्रायल अब उन्नत चरण में है, इसलिए यात्रा की अनुमति से जुड़े जोखिमों और तथ्यों का मूल्यांकन करने के लिए ट्रायल कोर्ट ही सही मंच है।

याचिका पर सीधे विचार करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इंद्राणी मुखर्जी को ट्रायल कोर्ट जाने की छूट दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:

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“उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, हम याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवेदन करने की स्वतंत्रता देते हैं। यदि आवेदन दाखिल किया जाता है, तो उस पर हमारे आदेश के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए, आवेदन का निपटारा चार सप्ताह के भीतर किया जा सकता है।”

कोर्ट ने दोहराया कि ट्रायल कोर्ट को शीर्ष अदालत द्वारा पहले से तय की गई समय सीमा और निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इस आवेदन पर निर्णय लेना चाहिए।

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