“आपका आईओ कोर्ट के साथ ‘लुका-छिपी’ क्यों खेल रहा है?”: नोएडा हेट क्राइम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2021 के नोएडा हेट क्राइम मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दायर ‘अनुपालन हलफनामे’ (Compliance Affidavit) पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जांच की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से पूछा कि संबंधित जांच अधिकारी (IO) विशिष्ट आपराधिक धाराओं को जोड़ने के मामले में अदालत के साथ “लुका-छिपी” क्यों खेल रहा है।

यह मामला एक वरिष्ठ नागरिक की याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 4 जुलाई, 2021 को नोएडा में व्यक्तियों के एक समूह द्वारा उन्हें “गाली दी गई, प्रताड़ित किया गया और व्यवस्थित रूप से उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई।” याचिकाकर्ता का दावा है कि उनकी दाढ़ी और मुस्लिम पहचान के कारण उन्हें निशाना बनाया गया और हमले के दौरान उन पर अपमानजनक धार्मिक टिप्पणियां की गईं।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुख्य मुद्दा पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-बी को लागू न करना था। यह धारा राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन और बयानों से संबंधित है। विशेष बात यह है कि 16 फरवरी को राज्य सरकार ने खुद स्वीकार किया था कि शिकायत के आधार पर धारा 153-बी और धारा 295-ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया कृत्य) के तहत मामला बनता है।

बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज से पूछा, “आपका आईओ इस अदालत के साथ लुका-छिपी क्यों खेल रहा है?” अदालत ने इस बात पर गौर किया कि जब राज्य पहले ही मान चुका था कि ये धाराएं एफआईआर का हिस्सा होनी चाहिए, तो नए हलफनामे में धारा 153-बी को फिर से क्यों हटा दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए बुलाने का संकेत दिया था, लेकिन एएसजी के अनुरोध के बाद इसे टाल दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने अधिकारियों के भविष्य के आचरण को लेकर सख्त चेतावनी दी।

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बेंच ने कानून अधिकारी से कहा, “कृपया अपने अधिकारियों को सलाह दें, अन्यथा वे मुसीबत में पड़ जाएंगे। हमें उन्हें बुलाकर फटकार लगाने में कोई आनंद नहीं आता।” एएसजी नटराज ने अदालत को आश्वासन दिया कि पुलिस धारा 153-बी सहित सभी आवश्यक कानूनी प्रावधानों को जोड़ना सुनिश्चित करेगी।

याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष जांच और मुकदमे की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गौतम बुद्ध नगर की स्थानीय पुलिस हेट क्राइम के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दिए गए निवारक और उपचारात्मक निर्देशों का पालन करने में विफल रही है।

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पीड़ित के अनुसार, उन्हें रोककर हमला किया गया और उनकी धार्मिक पहचान से जुड़े अपशब्द कहे गए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि शुरुआत में दर्ज की गई एफआईआर में अपराध की गंभीरता और नफरत से प्रेरित प्रकृति को नजरअंदाज किया गया था। इससे पहले 3 फरवरी को भी कोर्ट ने राज्य से पूछा था कि एफआईआर में उचित धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपने निर्देशों का पूरी तरह पालन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

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