सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने असम में दर्ज एक आपराधिक मामले में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदोलकर की पीठ ने खेड़ा को असम की संबंधित अदालत में जाकर अग्रिम जमानत लेने का निर्देश दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ की गई टिप्पणियों से जुड़ा है।
विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई, जिसमें पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास एक से अधिक पासपोर्ट और अघोषित विदेशी संपत्ति है। खेड़ा ने यह दावा भी किया कि मुख्यमंत्री ने 9 अप्रैल के विधानसभा चुनावों के लिए दाखिल अपने चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों की जानकारी छिपाई थी। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा करार दिया था।
इन बयानों के बाद, गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), धारा 35 (शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह मामला अदालती हस्तक्षेपों के एक लंबे दौर के बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इससे पहले 15 अप्रैल को, शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी।
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि इस मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट का कोई क्षेत्राधिकार नहीं बनता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि याचिका में इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि खेड़ा ने उस राज्य की अदालत जाने के बजाय तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख क्यों किया, जहां मामला दर्ज है।
वहीं, खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 20 अप्रैल तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की गुहार लगाई। हालांकि, पीठ का मानना था कि इस मामले में उचित कानूनी उपचार असम की अदालतों के अधिकार क्षेत्र में ही आता है।
सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए निचली अदालत को निष्पक्ष सुनवाई के लिए निर्देश दिए हैं। पीठ ने असम की अदालत से खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर शीघ्रता से सुनवाई करने को कहा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि असम की सक्षम अदालत मामले के गुणों (merits) के आधार पर अपना फैसला ले। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सुनवाई के दौरान इस मामले में सुप्रीम कोर्ट या तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में की गई किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है।

