गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के मोटेरा स्थित आश्रम द्वारा दायर उन अपीलों को खारिज कर दिया, जिनमें सरकारी जमीन को वापस लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस निर्णय से 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और भविष्य के ओलंपिक प्रस्तावों के लिए प्रस्तावित ‘सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स’ के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन राय की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस पुराने आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आवंटन की शर्तों के उल्लंघन और साबरमती नदी बेल्ट सहित सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की बात कही गई थी।
यह पूरा कानूनी विवाद मोटेरा में नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित 45,000 वर्ग मीटर से अधिक जमीन को लेकर है। राजस्व अधिकारियों ने संतोष श्री आसाराम ट्रस्ट को बेदखली के नोटिस जारी किए थे। सरकार का आरोप था कि ट्रस्ट ने न केवल आवंटित जमीन की शर्तों का उल्लंघन किया है, बल्कि आसपास की खुली सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर लिया है।
ट्रस्ट ने पहले गुजरात राजस्व न्यायाधिकरण (GRT) और फिर हाईकोर्ट की एकल पीठ का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से राहत न मिलने पर खंडपीठ में अपील दायर की। ट्रस्ट का तर्क था कि सरकार का यह कदम “पूर्वनियोजित” है और खेल परिसर बनाने के लिए अतिक्रमण का बहाना बनाकर जमीन छीनी जा रही है।
खंडपीठ ने ट्रस्ट की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए अवैध कब्जे के तथ्यों पर ध्यान केंद्रित किया। कोर्ट ने पाया कि ट्रस्ट ने आवंटित भूखंडों की शर्तों का उल्लंघन तो किया ही, साथ ही साबरमती नदी के किनारे (रिवरबेल्ट) की जमीन पर भी अवैध रूप से कब्जा जमाया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:
“मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, याचिका में की गई कोई भी मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता द्वारा अतिक्रमित रिवरबेड (नदी तल) की भूमि के नियमितीकरण का तो प्रश्न ही नहीं उठता। ऐसी कोई भी रियायत सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के विपरीत होगी।”
फैसला आने के बाद, ट्रस्ट ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए चार सप्ताह के स्टे की मांग की। हालांकि, सरकारी वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ता को बेदखली का नया नोटिस दिया जाएगा, जिससे उन्हें प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्टे देने से इनकार कर दिया।
अब यह 45,000 वर्ग मीटर का भूखंड सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव का हिस्सा बनेगा, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मोटेरा स्थित यह आश्रम लंबे समय से विवादों के केंद्र में रहा है। आश्रम के संस्थापक आसाराम (84) वर्तमान में दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। 2013 में राजस्थान के आश्रम में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उन्हें सजा हुई थी। इसके बाद, जनवरी 2023 में गांधीनगर की एक अदालत ने उन्हें 2001 से 2006 के बीच मोटेरा आश्रम में एक महिला शिष्या के साथ बार-बार दुष्कर्म करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

