झारखंड की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या और भीड़भाड़ की समस्या को गंभीरता से लेते हुए, झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को ‘ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन्स’ (OCIs) यानी खुली जेलों की स्थापना के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य के गृह सचिव को तीन सदस्यीय समिति गठित करने को कहा है। यह समिति राज्य भर में खुली जेलों के विस्तार की संभावनाओं और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप सुप्रीम कोर्ट द्वारा मार्च 2024 में जारी किए गए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश के बाद आया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुली जेलों के नेटवर्क का विस्तार करने का आदेश दिया था, ताकि इन्हें पारंपरिक ‘बंद’ जेलों के एक प्रभावी विकल्प के रूप में विकसित किया जा सके।
मौजूदा जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों का होना इस सुधार की मुख्य वजह है। अत्यधिक भीड़ के कारण कैदियों के सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया बाधित होती है। खुली जेलों की अवधारणा ऐसे कैदियों के लिए है जिनका आचरण अच्छा रहा है। यहाँ उन्हें कम निगरानी में रहने की अनुमति दी जाती है, जिससे समाज की मुख्यधारा में उनकी वापसी आसान हो सके।
अदालत ने केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि कैदियों की जीवन स्थितियों में सुधार लाने पर भी बल दिया। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि कैदियों के लिए न्यूनतम मानक लागू किए जाने चाहिए, जिसमें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं और मानवाधिकारों का संरक्षण शामिल है।
नवनियुक्त समिति इन सभी आवश्यकताओं का व्यापक अध्ययन करेगी और अदालत को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून के लिए तय की है, जिसमें समिति और गृह विभाग द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

