रोटोमैक घोटाला: ट्रायल में देरी की संभावना के चलते बिजनेसमैन राजेश बोथरा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रोटोमैक “घोटाले” से जुड़े एक मामले में बिजनेसमैन राजेश बोथरा को जमानत दे दी है। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने यह पाया कि केस के ट्रायल में काफी समय लगने की संभावना है, जिसे आधार बनाते हुए कोर्ट ने मंगलवार को बोथरा की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किए गए इस मामले में रोटोमैक एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों, बिल ऑफ लैडिंग और बनावटी लेन-देन के जरिए बैंक से क्रेडिट सुविधाएं हासिल कर धोखाधड़ी की। बाद में इन ऋणों की अदायगी नहीं की गई, जिसके चलते बैंक को भारी नुकसान हुआ। CBI ने इस मामले में साल 2020 में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।

राजेश बोथरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बोथरा ने जांच के दौरान हमेशा सहयोग किया है, यहाँ तक कि कोविड-19 महामारी की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उन्होंने जांच एजेंसी का साथ दिया। इसके अलावा, बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी को इस मामले से संबंधित अन्य केसों में पहले ही जमानत मिल चुकी है और उन्होंने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है।

वहीं, जमानत अर्जी का विरोध करते हुए CBI के वकील अनुराग कुमार सिंह ने दलील दी कि इस कथित धोखाधड़ी में बोथरा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बोथरा ने अपनी कंपनियों के माध्यम से ऐसे ट्रांजेक्शन किए जिनका उद्देश्य बैंक को गुमराह करना और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देना था।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर गौर किया कि जांच के दौरान CBI ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया था। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने आगे स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आवेदक ने जमानत या अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।

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कोर्ट ने मामले की प्रक्रियात्मक स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि ट्रायल के जल्द पूरा होने के आसार नहीं हैं और इसमें देरी की पूरी संभावना है। इन परिस्थितियों और जांच में आरोपी के निरंतर सहयोग को देखते हुए, हाईकोर्ट ने राजेश बोथरा को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

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