वेंजरमूडू सामूहिक हत्याकांड पर आधारित फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से केरल हाईकोर्ट का इनकार

 केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें फीचर फिल्म ‘कालम परंजा कथा’ (Kaalam Paranja Kadha) की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी। आरोप है कि यह फिल्म 2025 के चर्चित वेंजरमूडू सामूहिक हत्याकांड पर आधारित है। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने मुख्य आरोपी के पिता द्वारा दायर उस याचिका को अस्वीकार कर दिया, जिसमें तर्क दिया गया था कि फिल्म के प्रदर्शन से चल रहे आपराधिक मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचेगी।

यह कानूनी चुनौती ए.आर. अफ़ान के पिता अब्दुल रहीम द्वारा पेश की गई थी। अफ़ान को 24 फरवरी, 2025 को तिरुवनंतपुरम के वेंजरमूडू में अपने भाई, चाचा, चाची और प्रेमिका की कथित तौर पर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष का यह भी आरोप है कि अफ़ान ने अपनी मां की भी हत्या करने की कोशिश की थी, जो गंभीर चोटों के बावजूद जीवित बच गईं।

अपनी याचिका में रहीम ने दलील दी कि प्रसाद नूरनाड द्वारा निर्देशित यह फिल्म “मीडिया ट्रायल” को जन्म देगी, जिससे गवाहों के प्रभावित होने और उनके बेटे के निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) के अधिकार के हनन की संभावना है। याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि इस घटना का फिल्मी चित्रण जीवित बचे परिवार के सदस्यों की गरिमा और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाएगा।

याचिकाकर्ता ने अदालत से फिल्म के वितरण और स्क्रीनिंग पर रोक लगाने का आदेश देने का अनुरोध किया था, उनका दावा था कि फिल्म सीधे तौर पर लंबित आपराधिक मामले के संवेदनशील विवरणों का संदर्भ देती है।

याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने इस स्तर पर रचनात्मक कार्य की रिलीज को रोकने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया। हालांकि विस्तृत लिखित आदेश की प्रतीक्षा है, लेकिन हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी ने स्पष्ट किया कि फिल्म के प्रदर्शन से मुकदमे की प्रक्रिया बाधित नहीं होगी।

READ ALSO  विधायकों के खिलाफ 5,000 मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश की मांग

यह फैसला भारतीय न्यायपालिका के उन पिछले उदाहरणों के अनुरूप है, जहां अदालतों ने अक्सर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए सच्ची आपराधिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों की रिलीज पर रोक लगाने में हिचकिचाहट दिखाई है। अदालतों का यह भी मानना रहा है कि न्यायिक अधिकारी इतने प्रशिक्षित होते हैं कि वे लोकप्रिय मीडिया चित्रणों से प्रभावित नहीं होते।

READ ALSO  आतंकी फंडिंग मामले में यासीन मलिक को वस्तुतः पेश करने की याचिका पर हाई कोर्ट 7 अगस्त को सुनवाई करेगा
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles