बैंक रिकॉर्ड फर्जीवाड़ा मामला: मध्य प्रदेश के विधायक राजेंद्र भारती की सजा को चुनौती, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अपील पर अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी किया है। भारती ने धोखाधड़ी और जालसाजी के एक पुराने मामले में अपनी दोषसिद्धि और तीन साल की जेल की सजा को चुनौती दी है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की है। यह मामला 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर अवैध रूप से ब्याज प्राप्त करने के आरोपों से जुड़ा है।

1 अप्रैल को एक ट्रायल कोर्ट ने भारती को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इनमें धारा 120B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) शामिल हैं।

दोषसिद्धि के बाद, 2 अप्रैल को कोर्ट ने जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व अध्यक्ष रहे भारती को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट में अपील दायर करने के लिए 60 दिनों की जमानत दी और सजा को निलंबित कर दिया।

सजा सुनाते समय ट्रायल कोर्ट ने कहा कि शारीरिक कारावास की तुलना में क्षतिपूर्ति से न्याय बेहतर होगा। इसी के तहत भारती पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो मध्य प्रदेश सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक सीमित, भोपाल को दिया जाएगा, क्योंकि मूल शिकायतकर्ता बैंक वर्तमान में परिसमापन (liquidation) की प्रक्रिया में है।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 24 अगस्त 1998 का है, जब भारती की दिवंगत मां सावित्रि देवी ने दतिया के जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक में एक पारिवारिक ट्रस्ट के नाम पर 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जमा की थी। यह जमा राशि तीन साल के लिए 13.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर थी।

आरोप है कि भारती और उनके सहयोगियों ने बैंक रिकॉर्ड में भौतिक रूप से छेड़छाड़ कर इस उच्च ब्याज दर को निर्धारित अवधि के बाद भी जारी रखने की साजिश रची। अभियोजन का दावा है कि रिकॉर्ड में व्हाइटनर (correction fluid) और ओवरराइटिंग का उपयोग करके तीन साल की अवधि को बढ़ाकर 10 और 15 साल कर दिया गया। इसके जरिए ट्रस्ट ने 2011 तक 13.5 प्रतिशत की दर से ब्याज निकाला, जबकि उस समय बाजार में ब्याज दरें काफी गिर चुकी थीं।

ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भारती, रघुवीर शरण प्रजापति और सावित्रि देवी ने बैंक को धोखा देने और अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से आपराधिक साजिश रची थी।

यह मामला मूल रूप से मध्य प्रदेश के दतिया में दर्ज किया गया था, लेकिन पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था। यह निर्णय उन दावों के बाद लिया गया था जिनमें कहा गया था कि स्थानीय स्तर पर बचाव पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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ट्रायल के दौरान भारती ने तर्क दिया कि यह पूरी कार्रवाई “राजनीति से प्रेरित” है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इन दलीलों को “अटकलबाजी” करार देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि विधायक ऐसे किसी भी राजनीतिक द्वेष या झूठे फंसाए जाने के दावों को साबित करने में विफल रहे।

भारती की मां सावित्रि देवी की 2019 में मृत्यु होने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी, लेकिन अदालत ने वित्तीय अनियमितताओं के लिए भारती और प्रजापति को उत्तरदायी माना है।

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