लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता से जुड़ी एक याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार को विस्तृत सुनवाई की। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल, 2026 की तारीख तय की है।
केंद्र सरकार द्वारा इस विषय को बेहद संवेदनशील बताए जाने के बाद, अदालत की कार्यवाही जज के चैम्बर में संपन्न हुई।
यह पूरा मामला कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने लखनऊ की एक विशेष एमपी/एलएसी अदालत के 28 जनवरी, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गांधी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग वाली उनकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था। निचली अदालत ने तब कहा था कि नागरिकता के मुद्दे पर निर्णय लेना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
शिशिर ने अपनी याचिका में मामले की विस्तृत जांच और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ निम्नलिखित कानूनों के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए हैं:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS)
- आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act)
- विदेशी अधिनियम (Foreigners Act)
- पासपोर्ट अधिनियम (Passport Act)
इससे पहले की सुनवाइयों के दौरान, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से उन शिकायतों पर की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी थी, जिनमें राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता होने का दावा किया गया था। इसके जवाब में, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने संबंधित रिकॉर्ड पेश किए थे, जिनका अदालत ने बारीकी से परीक्षण किया है।
शुरुआत में यह शिकायत रायबरेली की विशेष एमपी/एलएसी अदालत में दर्ज कराई गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर, 2025 को इस मामले को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था।
चूंकि केंद्र सरकार ने इस मामले के दस्तावेजों और दलीलों को संवेदनशील बताया है, इसलिए हाईकोर्ट वर्तमान में याचिका की विचारणीयता और याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता पर गौर कर रहा है।

