इलाहाबाद हाईकोर्ट: कक्षा 6 से 8 के शिक्षकों हेतु टीईटी (TET) योग्यता अनिवार्य; नियम 8 में संशोधन और विज्ञापन पर शुद्धिपत्र जारी करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश दिया है कि वह ‘उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली, 1983’ के नियम 8 में संशोधन कर कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण होना अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल करे। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने पाया कि वर्तमान नियमों में एक “कमी” (gap) है, जो राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के निर्देशों के अनुरूप नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

हाईकोर्ट दो रिट याचिकाओं (रिट-ए संख्या 11604/2025 और 18038/2025) पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाओं में 30 जनवरी, 2025 को किए गए छठे संशोधन के बाद नियमावली के नियम 8 को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह नियम NCTE की 23 अगस्त, 2010 की अधिसूचना का उल्लंघन करता है, जो कक्षा 6 से 8 के सहायक अध्यापकों के लिए टीईटी अनिवार्य बनाती है।

इसके साथ ही, याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 28 जुलाई, 2025 को जारी उस विज्ञापन को रद्द करने की भी मांग की थी, जो इन कथित त्रुटिपूर्ण नियमों के तहत जारी किया गया था।

पक्षों के तर्क

याचिकाकर्ताओं का पक्ष: याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सुश्री तानिया पांडे और श्री संजय कुमार यादव ने दलील दी कि ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ की धारा 23(1) के तहत NCTE को शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2010 की अधिसूचना के बावजूद, राज्य की नियमावली में कई संशोधनों के बाद भी टीईटी उत्तीर्ण होने की शर्त को शामिल नहीं किया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अपर शिक्षा निदेशक के हलफनामे का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में 904 ऐसे संस्थान हैं जहाँ कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होती है। उन्होंने दलील दी कि बिना टीईटी योग्यता वाले सहायक अध्यापक इन स्कूलों में कक्षा 6 से 8 को पढ़ा रहे हैं, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 23 का उल्लंघन है।

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राज्य का पक्ष: अपर महाधिवक्ता श्री कार्तिकेय सरन ने तर्क दिया कि NCTE की 12 नवंबर, 2014 की अधिसूचना विशेष रूप से कक्षा 9 और 10 के लिए थी। उन्होंने कहा कि 2016 और 2025 के संशोधन इन्हीं उच्च कक्षाओं की भर्ती के उद्देश्य से किए गए थे। राज्य ने 2017 के एक पुराने अदालती आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि एलटी ग्रेड (LT Grade) की भर्तियां कक्षा 9 और 10 के लिए थीं, न कि 6 से 8 के लिए।

आयोग का पक्ष: लोक सेवा आयोग के वकील श्री फुजैल अहमद अंसारी ने अदालत के पूछने पर स्वीकार किया कि 28 जुलाई, 2025 के भर्ती नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नियुक्त किए जाने वाले शिक्षकों को किन कक्षाओं को पढ़ाना होगा।

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हाईकोर्ट का विश्लेषण

हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि प्रतिवादी यह साबित करने में विफल रहे कि 2010 की अधिसूचना के बाद कक्षा 6 से 8 के लिए कोई अलग भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।

खंडपीठ ने टिप्पणी की:

“प्रतिवादी यह नहीं कह सकते कि कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के पदों पर कोई रिक्ति नहीं है, विशेषकर तब जब अपर शिक्षा निदेशक ने स्वयं हलफनामे में स्वीकार किया है कि राज्य में 904 ऐसे संस्थान हैं जहाँ छात्र कक्षा 6 से 12 तक पढ़ते हैं।”

कोर्ट ने पाया कि चूंकि जुलाई 2025 का भर्ती नोटिस कक्षाओं के बारे में मौन था और 904 संस्थानों में छात्र कक्षा 6 से ही पढ़ रहे हैं, इसलिए टीईटी योग्यता का न होना एक गंभीर त्रुटि है।

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अदालत का निर्णय

हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि “नियम 8 में एक कमी है” और निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  1. नियम में संशोधन: राज्य को निर्देश दिया जाता है कि नियम 8 में अन्य योग्यताओं के साथ-साथ ‘टीईटी (पास)’ को भी अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया जाए, विशेषकर कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए।
  2. विज्ञापन में सुधार: लोक सेवा आयोग को एक शुद्धिपत्र (corrigendum) जारी करने का निर्देश दिया जाता है जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि 28 जुलाई, 2025 का विज्ञापन केवल कक्षा 9 और 10 के शिक्षकों की भर्ती से संबंधित है।
  3. राज्य का निर्देश: राज्य सरकार आयोग को इस शुद्धिपत्र के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करेगी।

इन निर्देशों के साथ रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए निस्तारित कर दिया गया।

केस विवरण:

  • केस शीर्षक: अखिलेश एवं 3 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं 4 अन्य
  • केस संख्या: रिट – ए संख्या 11604/2025 (रिट – ए संख्या 18038/2025 के साथ)
  • खंडपीठ: जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस प्रशांत कुमार
  • दिनांक: 2 अप्रैल, 2026

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