रामावतार जग्गी हत्याकांड: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया; बरी करने का पिछला फैसला रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरुवार को लंबे समय से चल रहे रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य के पहले मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने 2007 के ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें अमित जोगी को बरी किया गया था। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर न्यायिक हिरासत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी मुद्दा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में अमित जोगी को बरी किए जाने की चुनौती से जुड़ा था। जबकि 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 अन्य लोगों को दोषी ठहराया था, अमित जोगी को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पीड़ित परिवार ने इस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि अभियोजन पक्ष ने साजिश में जोगी की संलिप्तता को पर्याप्त रूप से स्थापित किया है।

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रायपुर में रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई थी जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। अपराध की हाई-प्रोफाइल प्रकृति और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों के कारण, जांच अंततः राज्य पुलिस से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को स्थानांतरित कर दी गई थी।

मई 2007 में, रायपुर की एक ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें पाया गया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ आरोपों को सफलतापूर्वक साबित किया है। हालांकि, कोर्ट ने अमित जोगी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि उन्हें सीधे तौर पर अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

CBI ने शुरू में इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2011 में याचिका दायर करने में देरी के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। उस समय छत्तीसगढ़ सरकार और रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी द्वारा दायर अलग-अलग अपीलों को भी खारिज कर दिया गया था।

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मामले में नया मोड़ नवंबर 2023 में आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगने वाली CBI की याचिका पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों के बाद, हाईकोर्ट ने पिछले महीने कार्यवाही फिर से शुरू की।

सुनवाई के दौरान, CBI के वकील वैभव ए. गोवर्धन ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष्य अमित जोगी के खिलाफ आरोप स्थापित करने के लिए पर्याप्त थे। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि जोगी को बरी करना उन सबूतों के विपरीत था जिनके आधार पर उसी साजिश में शामिल 28 अन्य सह-आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित नई दलीलों को सुनने के बाद, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि अमित जोगी को बरी करने का ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द किए जाने योग्य है।

पीठ ने औपचारिक रूप से अमित जोगी को हत्या के मामले में दोषी ठहराया। CBI वकील के अनुसार, कोर्ट ने एक निर्देश जारी किया है जिसमें जोगी को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा गया है।

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यह निर्णय उस कानूनी लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ है जो दो दशकों से अधिक समय से भारतीय न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर चल रही थी।

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