ठाणे एमएसीटी का बड़ा फैसला: कंक्रीट मिक्सर से कुचले गए मजदूर के परिवार को 21.19 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश

ठाणे स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने 2016 में मुंबई के एक निर्माण स्थल पर हुई दुर्घटना में जान गंवाने वाले 36 वर्षीय व्यक्ति के परिजनों को 21.19 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकरण ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह हादसा कंक्रीट मिक्सर चालक की “लापरवाही और उतावलेपन” का परिणाम था। इसी के साथ अदालत ने बीमा कंपनी की उन तकनीकी दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिनके जरिए वह अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही थी।

यह दुखद घटना 21 अगस्त, 2016 की है, जब घनश्याम ललता प्रसाद यादव मुंबई के भोजवाड़ा इलाके के पास एक निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे। काम के दौरान ही वहां मौजूद एक रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) मिक्सर वाहन के चालक ने अचानक गाड़ी चालू कर दी।

अधिकरण की जांच में यह पाया गया कि चालक ने बिना किसी चेतावनी या यह सुनिश्चित किए कि रास्ता साफ है, भारी मशीनरी को गति दे दी। इस लापरवाही के कारण यादव वाहन की चपेट में आ गए और उनकी मृत्यु हो गई।

सदस्य आर वी मोहिते द्वारा 23 मार्च को पारित किए गए इस आदेश के विवरण सोमवार को उपलब्ध कराए गए। न्यायाधीश ने हादसे के लिए पूरी तरह से चालक को जिम्मेदार ठहराया।

न्यायाधीश मोहिते ने अपने आदेश में कहा, “चालक ने बिना किसी लुकआउट या चेतावनी के कंक्रीट मिक्सर को चालू किया और मृतक को कुचल दिया… यह उसके उतावलेपन और लापरवाही को दर्शाता है।”

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यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने इस दावे का विरोध किया था। कंपनी का तर्क था कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था और वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट भी सही नहीं था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।

हालांकि, अधिकरण ने इन तर्कों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने नोट किया कि बीमा कंपनी अपने दावों को साबित करने के लिए कोई भी ठोस सबूत पेश करने में विफल रही। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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कुल 21,19,000 रुपये की यह राशि मृतक के परिवार के वित्तीय भविष्य को ध्यान में रखते हुए तय की गई है, जिसमें निम्नलिखित घटक शामिल हैं:

  • भविष्य की आय और संभावनाओं का नुकसान
  • कंसोर्टियम (साहचर्य) की हानि
  • अंतिम संस्कार का खर्च
  • संपत्ति की हानि

अधिकरण ने यह भी आदेश दिया कि मुआवजे की इस राशि पर याचिका दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

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