घर में नमाज रोकने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के DM और SSP को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को 25 मार्च को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश उस याचिका पर आया है जिसमें एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने उसे उसके अपने घर के भीतर नमाज पढ़ने से रोका। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने तारिक खान द्वारा दायर याचिका पर यह निर्देश दिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 16 फरवरी को स्थानीय अधिकारियों ने उनके निजी आवास में प्रार्थना करने में बाधा डाली और उन्हें नमाज अदा करने से रोक दिया।

यह मामला किसी निजी स्थान पर धार्मिक अभ्यास करने के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता (AAG) अनूप त्रिवेदी ने याचिकाकर्ता के दावों का कड़ा विरोध किया।

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त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त स्थान पर लगभग 50 लोग नियमित रूप से नमाज अदा कर रहे हैं और इसमें किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं डाली गई है।

हाईकोर्ट द्वारा जिले के शीर्ष अधिकारियों को तलब करने के पीछे 12 फरवरी की एक पिछली सुनवाई भी है, जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने DM और SSP को अवमानना का नोटिस भी जारी किया है।

यह नोटिस 27 जनवरी, 2026 के एक न्यायिक आदेश की अनदेखी करने के लिए दिया गया है, जो ‘मैरानाथ फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य’ के मामले में पारित किया गया था। उस आदेश में निजी संपत्तियों में धार्मिक गतिविधियों के संबंध में राज्य के हस्तक्षेप को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे।

जिलाधिकारी और SSP को व्यक्तिगत रूप से तलब करना यह दर्शाता है कि हाईकोर्ट प्रशासनिक अतिरेक के आरोपों को बेहद गंभीरता से ले रहा है। 25 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में इन अधिकारियों को प्रशासन की कार्रवाई पर स्पष्टीकरण देना होगा और अवमानना के आरोपों का सामना करना होगा।

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