सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड (PIL) उस अवधि के लिए मौद्रिक मुआवजे की हकदार नहीं है, जिसके दौरान उसकी कोयला आपूर्ति गलत तरीके से निलंबित की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को निर्देश दिया है कि वह PIL को वर्ष 2014 या 2019 की ऐतिहासिक ‘प्रचलित दरों’ पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करे।
जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने 17 मार्च, 2026 को यह निर्णय सुनाते हुए ईंधन आपूर्ति बहाली से संबंधित पिछले न्यायिक आदेशों की व्याख्या पर चल रहे लंबे विवाद को समाप्त कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद की शुरुआत 13 जनवरी, 2006 को हुई जब कोयला मंत्रालय ने PIL के स्पंज आयरन और कैप्टिव पावर प्लांट के लिए मदनपुर (उत्तर) कोल ब्लॉक आवंटित किया था। 14 अक्टूबर, 2011 को मंत्रालय ने आरोप लगाया कि PIL ने अपने चोटिया ब्लॉक से कोयले को मोड़कर पावर प्लांट में इस्तेमाल किया है। इसके बाद, SECL ने 9 नवंबर, 2011 को कोयले की आपूर्ति निलंबित कर दी।
इस निलंबन को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जहाँ 2012 में सिंगल जज ने निलंबन आदेश को रद्द कर दिया। 2013 में एक डिवीजन बेंच ने इस फैसले की पुष्टि की और SECL को निर्देश दिया कि वह आपूर्ति बहाल करे और PIL को उस कीमत के अंतर का भुगतान करे जो उसे ई-नीलामी (E-auction) के माध्यम से अधिक दरों पर कोयला खरीदने के कारण उठाना पड़ा था।
9 अप्रैल, 2014 को सुप्रीम कोर्ट (SLP संख्या 8436/2013) ने इस राहत में संशोधन करते हुए कहा:
“याचिकाकर्ताओं (भारत संघ/SECL) को यह छूट होगी कि वे दिए गए मुआवजे के बदले प्रतिवादी (PIL) को उस अवधि के लिए प्रचलित दर पर कोयले की आपूर्ति करें जिसके दौरान आपूर्ति निलंबित रही थी… जैसा कि हमें सूचित किया गया है कि ईंधन आपूर्ति समझौता (FSA) समय बीतने के साथ समाप्त हो चुका है।”
मुकदमेबाजी के दूसरे दौर में, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 17 मई, 2019 को SECL के ‘टेपरिंग लिंकेज’ (Tapering Linkage) के आधार पर कोयला देने के प्रयासों को रद्द कर दिया और “प्रचलित दर पर सामान्य/नियमित कोयला लिंकेज” के तहत आपूर्ति का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त, 2025 को इस आदेश पर अपनी मुहर लगा दी थी।
पक्षों के तर्क
PIL ने विविध आवेदन (Miscellaneous Applications) दायर कर लगभग ₹106.59 करोड़ के मौद्रिक मुआवजे (6% ब्याज सहित) की मांग की थी। PIL का तर्क था कि:
- SECL द्वारा आज की ई-नीलामी कीमतों पर कोयला देने का प्रस्ताव मनमाना है और 2014 के आदेश के अनुरूप नहीं है।
- वर्तमान में भौतिक रूप से कोयला लेना PIL के लिए “किसी काम का नहीं” है क्योंकि उसके पास 2027 तक वैध मौजूदा समझौते हैं और अब वह अपनी स्वयं की वाणिज्यिक कोयला खदान भी संचालित कर रही है।
- नए समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से कोयला लेने के लिए मजबूर करने से मौजूदा अनुबंधों का पालन न कर पाने पर भारी जुर्माना लग सकता है।
दूसरी ओर, भारत संघ और SECL ने तर्क दिया कि वे आपूर्ति शुरू करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि वे केवल कोयले की आपूर्ति के लिए बाध्य हैं, न कि नकद भुगतान के लिए, और उन्होंने 2014 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के समय लागू कीमतों का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया।
कोर्ट का विश्लेषण
पीठ ने पाया कि दोनों पक्ष अपनी सुविधा के अनुसार पिछले न्यायिक निर्देशों की व्याख्या कर रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2014 और 2019 के आदेशों की विशिष्ट शब्दावली के आधार पर PIL की मौद्रिक मुआवजे की मांग का कोई कानूनी आधार नहीं है।
पीठ ने टिप्पणी की:
“किसी भी तरह की व्याख्या से, हाईकोर्ट या इस अदालत के आदेशों को भारत संघ/SECL के खिलाफ उस कोयले की कीमत के अंतर के लिए मुआवजा देने के निर्देश के रूप में नहीं समझा जा सकता है, जो प्रतिवादी ने उक्त अवधि के दौरान भुगतान किया था।”
कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि निर्देश केवल “निलंबित अवधि के लिए प्रचलित मूल्य पर और मौजूदा नीति के अनुसार कोयले की आपूर्ति” करने का था।
कोर्ट का निर्णय
मौद्रिक मुआवजे की प्रार्थना को खारिज करते हुए, कोर्ट ने आदेश दिया कि SECL को कोयले की आपूर्ति करने के अपने दायित्व को पूरा करना होगा। अनुपालन में हुई देरी और हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने प्रतिवादी को एक विकल्प दिया है।
कोर्ट के मुख्य निर्देश निम्नलिखित हैं:
- PIL के लिए विकल्प: PIL को 9 अप्रैल, 2014 या 17 मई, 2019 में से किसी एक तिथि की “प्रचलित कीमत और नीति” चुनने का विकल्प दिया गया है।
- क्रियान्वयन: एक बार जब PIL किसी एक तिथि का चयन कर लेती है और अपनी सहमति व्यक्त करती है, तो SECL को दो सप्ताह के भीतर ईंधन आपूर्ति समझौता (FSA) करना होगा।
- सामान्य लिंकेज: कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि आपूर्ति सामान्य कोयला लिंकेज के रूप में होगी, न कि टेपरिंग आधार पर।
- समय सीमा: निर्णय की तारीख से चार सप्ताह के भीतर संपूर्ण प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
मामले का विवरण
- केस टाइटल: यूनियन ऑफ इंडिया बनाम प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अन्य
- केस नंबर: विविध आवेदन संख्या 1806-1807/2025 (SLP (C) संख्या 3529-3530/2020 में)
- पीठ: जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी
- दिनांक: 17 मार्च, 2026

