लंबे समय तक जेल में रहने और जब्त किए गए नशीले पदार्थों के साथ कोई संबंध न होने के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने NDPS आरोपी को दी जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS एक्ट) के तहत आरोपी एक व्यक्ति की अपील स्वीकार करते हुए उसे नियमित जमानत दे दी है। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर ध्यान देते हुए कहा कि आरोपी लगभग दो साल से जेल में है और ट्रायल की गति काफी धीमी है, जिसके आधार पर जमानत का मामला बनता है।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता सत्यजीत भोई के खिलाफ महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाने में 25 मार्च 2024 को प्राथमिकी (FIR No. 29/2024) दर्ज की गई थी। उस पर NDPS एक्ट की धारा 20(B) के तहत आरोप लगाए गए थे। यह मामला एक ट्रक से 150 किलोग्राम गांजा बरामद होने से जुड़ा था।

भोई FIR की तारीख से ही हिरासत में था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (बिलासपुर) द्वारा 14 जुलाई 2025 को उसकी नियमित जमानत याचिका (MCRC No. 5275 of 2025) खारिज किए जाने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

पक्षकारों की दलीलें

अपीलकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अनिंदिता पुजारी, एडवोकेट श्री शैलेश्वर यादव, श्री रोहित कुमार-i (AOR), सुश्री राधिका महापात्रा और श्री शैलेंद्र सिंह ने दलील दी कि भोई के खिलाफ लगाए गए आरोप “असत्य” हैं। यह तर्क दिया गया कि अपीलकर्ता केवल उस ट्रक में एक यात्री था जिसे पकड़ा गया था। वकील ने कहा:

READ ALSO  मुस्लिम कानून के तहत दूसरी शादी तब तक अमान्य नहीं होगी जब तक सक्षम न्यायालय ऐसा घोषित न कर दे: इलाहाबाद हाईकोर्ट

“महज इसलिए कि अपीलकर्ता उस ट्रक में एक यात्री था जिसे रोका गया और वहां से प्रतिबंधित सामग्री (150 किलोग्राम गांजा) बरामद हुई, उसे अपीलकर्ता से नहीं जोड़ा जा सकता।”

बचाव पक्ष ने आगे जोर दिया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं लाया गया है जो अपीलकर्ता और नशीले पदार्थों के बीच किसी संबंध (nexus) को स्थापित करे। यह भी बताया गया कि ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं हुई है और अभी भी पंद्रह गवाहों का परीक्षण किया जाना बाकी है, जिससे ट्रायल में और देरी होना तय है।

READ ALSO  गोंदिया में नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोप में व्यक्ति को 40 साल की जेल

दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल श्री विक्रांत सिंह बैस, एडवोकेट श्री विनायक शर्मा और श्री रविंदर कुमार यादव (AOR) ने जमानत का विरोध किया। राज्य ने हलफनामे का हवाला देते हुए तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करके सही किया था क्योंकि ट्रक का चालक (सह-आरोपी) अभी भी जेल में है। राज्य का कहना था कि जमानत देने से ट्रायल की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।

कोर्ट का विश्लेषण और निर्णय

रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का अवलोकन करने और दोनों पक्षों को सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता लगभग दो साल से जेल में है। कोर्ट ने राहत की अर्जी में दम पाया और कहा:

“रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर विचार करते हुए, हमारी राय में, जमानत का मामला बनता है।”

कोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली और निर्देश दिया कि अपीलकर्ता को जल्द से जल्द संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए और ट्रायल कोर्ट उसे ऐसी शर्तों पर जमानत पर रिहा करे जो कार्यवाही में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उचित हों।

READ ALSO  अवैध निर्माण मामले में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे सोनू सूद

अपीलकर्ता के लिए निर्देश

पीठ ने रिहाई के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू कीं:

  • अपीलकर्ता आगामी ट्रायल में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
  • अपीलकर्ता अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा और किसी भी तरह से गवाहों को प्रभावित करने या रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेगा।
  • अपीलकर्ता सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर ट्रायल कोर्ट/विशेष कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहेगा, जब तक कि वह किसी वैध कारण से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्राप्त न कर ले।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि “शर्तों के किसी भी उल्लंघन के परिणामस्वरूप अपीलकर्ता को दी गई जमानत रद्द की जा सकती है।”

मामले का विवरण:

  • केस का शीर्षक: सत्यजीत भोई बनाम छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य
  • केस संख्या: क्रिमिनल अपील संख्या [SLP(Crl.) No. 2401/2026 से उत्पन्न]
  • कोरम: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां
  • आदेश की तिथि: 16 मार्च, 2026

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles