कन्नूर बम हमला: 2006 के हत्या मामले में केरल हाईकोर्ट ने 5 भाजपा कार्यकर्ताओं की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

केरल हाईकोर्ट ने कन्नूर में 2006 में एक युवा माकपा (CPI-M) कार्यकर्ता की हत्या के मामले में पांच भाजपा कार्यकर्ताओं की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने इस घटना को क्षेत्र में भाजपा और माकपा के बीच चल रही लगातार राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक दुखद परिणाम बताया, जिसमें एक युवक की जान चली गई।

जस्टिस ए के जयशंकरण नांबियार और जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 2006 की यह घटना भाजपा कार्यकर्ता पर हुए हमले का बदला लेने के लिए की गई थी। 13 जून, 2006 की रात को 24 वर्षीय याकूब पर देसी बम से हमला किया गया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, “यह एक और ऐसी घटना है जिसमें कन्नूर जिले में माकपा और भाजपा के बीच मौजूद राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण 24 वर्ष के एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी।”

दोषी करार दिए गए विजेश (43), प्रकाशन (48), काव्येश (43), मनोहरन (31) और संकरण मास्टर (49) ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने गवाहों के बयानों में विसंगतियों और एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को आधार बनाया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने चश्मदीदों की गवाही को विश्वसनीय माना। ये गवाह मृतक के साथी थे और हमले में खुद भी घायल हुए थे। हाईकोर्ट ने नोट किया कि गवाहों ने पांचों आरोपियों की मुख्य अपराधियों के रूप में स्पष्ट पहचान की थी। एफआईआर में 6 घंटे की देरी पर हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जवाबी हिंसा रोकने में व्यस्त थी, इसलिए यह देरी जायज है।

मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने इस मौत को पूरी तरह ‘होमिसाइडल’ (मानव वध) करार दिया। रिपोर्ट के अनुसार, बम विस्फोट से सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मस्तिष्क पूरी तरह नष्ट हो गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही बम एक व्यक्ति ने फेंका हो, लेकिन पूरी भीड़ ‘साझा उद्देश्य’ (Common Objective) के सिद्धांत के तहत उत्तरदायी है।

हाईकोर्ट ने कहा, “देसी बम फेंककर मृतक के सिर पर घातक चोट पहुंचाने वाले आरोपी यह नहीं कह सकते कि उनका इरादा हत्या करने का नहीं था।”

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने एक गैर-कानूनी सभा बनाई और हथियारों के साथ उस घर में घुस गए जहां याकूब और उसके साथी मौजूद थे। डर के मारे जब माकपा कार्यकर्ता अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे, तब आरोपियों ने उनका पीछा किया और याकूब के सिर पर निशाना साधकर बम फेंका, जिससे उसकी तत्काल मृत्यु हो गई।

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