इंदौर जल प्रदूषण मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच आयोग को विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए एक माह का समय दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों की जांच कर रहे आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आयोग द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ इस मामले से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत के समक्ष यह जानकारी दी गई कि मामले की जांच के लिए गठित एकल सदस्यीय आयोग, जिसकी अध्यक्षता पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता कर रहे हैं, ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश कर दी है।

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने अभी तक आयोग को कई महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। इनमें मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पेयजल की जांच से संबंधित रिपोर्ट और जल आपूर्ति पाइपलाइन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

READ ALSO  चोरों ने जज की एम्बेसडर कार चुराई; फिर हुआ ये

अंतरिम रिपोर्ट पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आयोग द्वारा मांगी गई सभी सूचनाएं और रिकॉर्ड जल्द से जल्द उपलब्ध कराए जाएं, ताकि जांच पूरी की जा सके। अदालत ने आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक माह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल निर्धारित की है।

इस बीच, एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल नए आवेदन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय बगड़िया ने अदालत को बताया कि नगर निगम के एक बड़े ओवरहेड पानी के टैंक की देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने बिना किसी अनुमति या कारण के टैंक में पोटैशियम क्लोराइड की गोलियां डाल दीं।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि भगीरथपुरा क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराने वाले इस टैंक में पोटैशियम क्लोराइड की अधिक मात्रा मिल जाने से पेयजल दूषित हो गया, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। अदालत इस आवेदन पर भी 6 अप्रैल को सुनवाई कर सकती है।

गौरतलब है कि भगीरथपुरा क्षेत्र में पिछले वर्ष दिसंबर के अंत में उल्टी और दस्त के मामलों का अचानक प्रकोप सामने आया था, जिसे दूषित पेयजल से जोड़ा गया। स्थानीय निवासियों और कांग्रेस ने इस घटना में 36 लोगों की मौत का दावा किया है। हालांकि 19 फरवरी को राज्य विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि इस घटना में 22 लोगों की मौत दूषित पानी के कारण हुई।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles