केरल हाईकोर्ट ने अरालम फार्म क्षेत्र में आदिवासी परिवारों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। शनिवार सुबह हाथी के हमले में 44 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं और मौजूदा सुरक्षा इंतज़ाम बेहद कमजोर हैं।
न्यायमूर्ति ए.के. जयशंकरन नंबियार और न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन की खंडपीठ ने अरालम फार्म और ट्राइबल रिहैबिलिटेशन एंड डेवलपमेंट मिशन क्षेत्र की स्थिति को “दयनीय” बताया। अदालत ने सरकार की प्रतिक्रिया को “पूरी तरह अपर्याप्त” करार देते हुए कहा कि बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि संवेदनशील आबादी की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव हमलों में होने वाली हर मौत को अलग-थलग घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने कहा कि यह प्रशासनिक ढांचे की खामियों का संकेत है और राज्य को ठोस रोकथाम उपायों के साथ सामने आना होगा।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च के लिए तय करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उनसे पूछा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और अरालम क्षेत्र के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
अरालम क्षेत्र में पुनर्वासित आदिवासी समुदाय लंबे समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या से जूझ रहा है। अदालत की सख्त टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार से अब ठोस और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

