मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार से सवाल किया कि राजनीतिक जुलूसों और रैलियों की अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती। अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें राज्य सरकार द्वारा बनाए गए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश एम. एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। यह याचिका तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की ओर से उसके संयुक्त महासचिव सी. टी. आर. निर्मल कुमार ने दायर की है।
याचिका में उस SOP को रद्द करने की मांग की गई है जिसे राज्य सरकार ने 27 सितंबर 2025 को करूर में हुई भगदड़ के बाद लागू किया था। अभिनेता-राजनेता विजय की रैली के दौरान हुई इस घटना में 41 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए कड़े दिशा-निर्देश बनाए गए थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ये दिशा-निर्देश पहले से दिए गए हाईकोर्ट के आदेशों के आधार पर तैयार किए गए थे और याचिकाकर्ता को स्पष्ट करना होगा कि इनमें कौन-सी बात आपत्तिजनक है।
पीठ ने यह भी कहा कि अनुमति के लिए केवल ऑफलाइन प्रक्रिया रखना उचित नहीं लगता और पूछा कि सरकार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा क्यों नहीं दे सकती। अदालत के अनुसार, डिजिटल प्रणाली से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम हो सकती है।
अदालत ने SOP के उस प्रावधान पर भी टिप्पणी की जिसमें लंबे समय से चुनाव लड़ने और सांसद-विधायक चुनवाने वाले दलों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रावधान अनुचित नहीं लगता।
अब सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे सुनवाई होगी, जिसमें अदालत अनुमति प्रक्रिया और करूर हादसे के बाद बने नियमों की वैधता पर विचार करेगी।

