गिरफ्तारी के लिखित आधार देना अनिवार्य: उड़ीसा हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशिक्षण के दिए सख्त निर्देश, उल्लंघन पर स्वतः जमानत का संकेत

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस और गृह विभाग को निर्देश दिया है कि गिरफ्तारी के समय प्रत्येक व्यक्ति को लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराने के संवैधानिक प्रावधान का सख्ती से पालन कराया जाए। अदालत ने इसके लिए पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने का आदेश भी दिया है।

न्यायमूर्ति गौरिशंकर सतपथी ने यह निर्देश जुलाई 2025 में नयागढ़ बैंक डकैती मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 47 के प्रावधानों का बार-बार उल्लंघन हो रहा है, जिससे गिरफ्तारी की वैधानिकता पर सवाल खड़े होते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में नहीं दिए जाते, तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है। इस स्थिति में आरोपी को स्वतः जमानत पाने का अधिकार मिल सकता है।

हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे पुलिस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम सुनिश्चित करें ताकि गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान संवैधानिक और वैधानिक नियमों का पालन हो। अदालत ने कहा कि प्रक्रियागत त्रुटियाँ न केवल मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं बल्कि अभियोजन के पूरे मामले को भी कमजोर कर सकती हैं।

READ ALSO  उपभोक्ता न्यायालय ने यात्री को वीज़ा आवश्यकता के बारे में सूचित न करने पर लुफ्थांसा को 1 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles