गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को कथित रूप से ‘मिया’ समुदाय के खिलाफ घृणास्पद और सांप्रदायिक बयान देने के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को भी जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी।
मुख्य न्यायाधीश अशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की। फिलहाल अदालत ने नोटिस जारी करने के अलावा कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है।
इनमें से एक याचिका 24 फरवरी को असमिया साहित्यकार हीरेन गोहैन, पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण देका और वरिष्ठ पत्रकार परेश मलाकार ने दायर की थी। इसके अलावा सीपीआई और सीपीआई(एम) ने 21 फरवरी को अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर मुख्यमंत्री को ऐसे बयान देने से रोकने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता संतanu बोरठाकुर ने बताया कि अदालत ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अभी कोई अन्य आदेश नहीं दिया गया है।
इस पूरे विवाद से पहले 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक वायरल वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें एक विशेष समुदाय की ओर निशाना साधकर राइफल चलाते हुए दिखाया गया था।
‘मिया’ शब्द परंपरागत रूप से असम में बंगाली भाषी मुस्लिमों के लिए एक अपमानजनक संबोधन माना जाता रहा है, जिसे अक्सर अवैध प्रवास के आरोपों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में समुदाय के कुछ लोगों ने इस शब्द को अपनी पहचान के रूप में अपनाना शुरू किया है।
हाईकोर्ट अब 21 मार्च को मामले पर आगे की सुनवाई करेगा।

