आवासीय सोसायटियों में EV चार्जिंग प्वाइंट: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व यूपी सरकार से मांगा जवाब; CJI ने ‘मशरूमिंग’ PIL पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवासीय सोसायटियों में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी 2024 दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। मामले की सुनवाई 13 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आवासीय परिसरों में EV मालिकों को निजी चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने में आने वाली बाधाओं पर संज्ञान लिया।

सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता के वकील ने आग्रह किया कि उनकी याचिका को समान लंबित मामलों के साथ टैग किया जाए, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताई।

पीठ ने कहा, “हम एक और याचिका सूची में क्यों जोड़ें,” और जनहित याचिकाओं की “मशरूमिंग ग्रोथ” पर चिंता व्यक्त की।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ लोग अखबार पढ़कर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में PIL दाखिल कर देते हैं।

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हालांकि, बाद में न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और कुशमैन एंड वेकफील्ड मैनेजमेंट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सचिव को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ता, जो ग्रेटर नोएडा का निवासी है, ने आरोप लगाया कि उसकी हाउसिंग सोसायटी ने उसके आवंटित पार्किंग स्थान पर निजी EV चार्जिंग प्वाइंट लगाने से रोक दिया, जबकि उसने सभी खर्च स्वयं वहन करने की पेशकश की थी।

याचिका के अनुसार, सोसायटी में लगभग 4,000 फ्लैट और करीब 56 इलेक्ट्रिक वाहन हैं, लेकिन केवल दो साझा चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध हैं।

याचिका में कहा गया है कि यह अनुपात “अत्यंत अपर्याप्त” है, जिससे EV उपयोगकर्ताओं के लिए दैनिक आवागमन और वाहन रखरखाव कठिन हो जाता है।

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याचिकाकर्ता ने ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी “Guidelines for Installation and Operation of EV Charging Infrastructure, 2024” का हवाला देते हुए कहा कि ये दिशानिर्देश आवंटित पार्किंग स्थान पर सुरक्षा मानकों के अधीन निजी चार्जिंग यूनिट लगाने की अनुमति देते हैं।

याचिका में इन दिशानिर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन और EV मालिकों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

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