सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पार्टियों ने अपने मुख्य समझौते या “मदर एग्रीमेंट” (Mother Agreement) में मध्यस्थता का स्थान (Seat of Arbitration) विदेश में चुना है, तो भारतीय अदालतों के पास मध्यस्थ (Arbitrator) नियुक्त करने का क्षेत्राधिकार नहीं है. जस्टिस पमीदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर
