केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को फिल्म “द केरला स्टोरी 2 – गोज़ बियॉन्ड” को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति बेच्चू कुरियन थॉमस मामले की सुनवाई कर रहे हैं और दोपहर बाद बहस जारी रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि 27 फरवरी को प्रस्तावित रिलीज से पहले वह फिल्म का अवलोकन करेगी या नहीं।
यह याचिका कन्नूर जिले के कन्नवम निवासी श्रीदेव नंबूदिरि ने दायर की है। इसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सीबीएफसी तथा फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका में प्रमाणपत्र को रद्द करने के साथ-साथ कुछ संशोधन करने तथा फिल्म के शीर्षक पर पुनर्विचार करने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि सीबीएफसी ने सिनेमेटोग्राफ अधिनियम, 1952 के वैधानिक प्रावधानों का समुचित पालन किए बिना ही फिल्म को प्रमाणन दे दिया।
याचिका के अनुसार, फिल्म के टीज़र और ट्रेलर में कई राज्यों की महिलाओं से जुड़े कथानक दिखाए गए हैं, लेकिन उन्हें “द केरला स्टोरी” शीर्षक के तहत प्रस्तुत किया गया है, जिससे कथित तौर पर आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय षड्यंत्र जैसी घटनाओं को विशेष रूप से केरल राज्य से जोड़ दिया गया है।
याचिका में कहा गया है कि ऐसा चित्रण “पूरे क्षेत्रीय समुदाय को कलंकित करने, सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने तथा सांप्रदायिक और क्षेत्रीय वैमनस्य को बढ़ाने की क्षमता रखता है।”
हाईकोर्ट फिलहाल याचिका की सुनवाई कर रहा है और यह तय किया जाना बाकी है कि अदालत फिल्म को रिलीज से पहले देखेगी या नहीं। इसके बाद मामले में आगे के आदेश पारित किए जाने की संभावना है।

