सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच पेनियार नदी जल विवाद के समाधान के लिए एक माह में ट्रिब्यूनल बनाए केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पेनियार नदी के जल बंटवारे को लेकर जारी विवाद के निपटारे के लिए एक जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन करे और एक माह के भीतर इसकी अधिसूचना जारी करे।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह आदेश तमिलनाडु द्वारा दायर एक मूल वाद की सुनवाई के दौरान पारित किया, जिसमें राज्य ने कर्नाटक द्वारा पेनियार नदी पर बनाए जा रहे चेक डैम और जल प्रवाह में बदलाव पर आपत्ति जताई थी।

न्यायमूर्ति नाथ ने आदेश सुनाते हुए कहा,
“हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि केंद्र सरकार को निर्देश देने से परहेज़ करने का कोई कारण नहीं है। अतः केंद्र सरकार को निर्देशित किया जाता है कि वह एक माह की अवधि के भीतर इस विवाद के समाधान हेतु एक जल विवाद ट्रिब्यूनल गठित करे और इसकी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित करे।”

फैसले का विस्तृत विवरण आना अभी बाकी है।

तमिलनाडु सरकार ने 2018 में अनुच्छेद 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट में एक मूल वाद दायर किया था। इसमें कर्नाटक द्वारा पेनियार नदी पर चेक डैम निर्माण और जल के प्रवाह में एकतरफा हस्तक्षेप को चुनौती दी गई थी।

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तमिलनाडु का कहना है कि चूंकि पेनियार एक अंतरराज्यीय नदी है, इसलिए यह राष्ट्रीय संपत्ति है और कोई भी राज्य इस पर एकाधिकार नहीं जता सकता। राज्य ने आरोप लगाया कि कर्नाटक ने बिना किसी आपसी सहमति के नदी पर निर्माण कार्य किए, जो जल के समानुपातिक और न्यायसंगत वितरण के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

तमिलनाडु द्वारा कई बार मांग किए जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया था। इस देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई और अब केंद्र को बाध्य किया है कि वह तय समय सीमा में ट्रिब्यूनल बनाए।

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यह आदेश उन तमाम अंतरराज्यीय जल विवादों की कड़ी में एक अहम कदम है जो पहले भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हल किए गए हैं, जैसे कि कावेरी, कृष्णा और महादयी विवाद।

अब निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह कब ट्रिब्यूनल का गठन करती है और इस विवाद को औपचारिक रूप से उसके पास भेजती है।

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