गिरफ्तारी पर सीसीटीवी फुटेज गायब होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, प्रमुख सचिव (गृह) से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को पीजीआई, लखनऊ थाने से सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने पर सख्त नाराज़गी जताई। अदालत ने पुलिस आयुक्त द्वारा तकनीकी खराबी का हवाला दिए जाने पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकारी केवल तकनीकी खामी का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की है।

यह निर्देश एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया गया है, जो विवेक सिंह के पिता द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप है कि विवेक सिंह को 7 नवंबर 2025 को पीजीआई थाने में अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, थाने की सीसीटीवी फुटेज से हिरासत की परिस्थितियों का पता लगाया जा सकता है।

जवाब में लखनऊ के पुलिस आयुक्त ने एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया कि थाने की सीसीटीवी प्रणाली में तकनीकी खामी आ जाने के कारण फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी।

अदालत ने इस स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी फुटेज को एक निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस आयुक्त के हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि सीसीटीवी कब से काम करना बंद कर दिया और बैकअप क्यों नहीं रखा गया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि “तकनीकी खराबी का अस्पष्ट बहाना जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं हो सकता।”

कोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करें:

  • सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध क्यों नहीं है?
  • सुप्रीम कोर्ट व डीजीपी के निर्देशों के अनुसार फुटेज सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया?
  • पुलिस थानों में सीसीटीवी संचालन और डाटा सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
READ ALSO  [चेक बाउंस मामला] सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए नए दिशानिर्देश – धारा 138 एनआई एक्ट मामलों में अनिवार्य होगा नया सिनॉप्सिस प्रारूप, कम्पाउंडिंग मानकों में संशोधन

अब यह मामला 18 फरवरी को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles