बंबई हाईकोर्ट ने पिछले साल आज़ाद मैदान में मराठा आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन को याद करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने “शहर को बर्बाद कर दिया” और बिना साफ-सफाई किए वहां से चले गए, जबकि अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे इलाके की सफाई करके ही हटें।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने सोमवार को उस याचिका की सुनवाई के दौरान दी, जिसमें धनगर समुदाय के एकदिनी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी।
याचिकाकर्ता दीपक बोरहड़े ने 21 जनवरी को आज़ाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे पुलिस ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने कहा, “हम मराठा समुदाय द्वारा पिछले साल किए गए प्रदर्शन को याद करते हैं। उन्होंने एक दिन के लिए अनुमति मांगी थी लेकिन छह दिन तक रुके। प्रदर्शनकारियों ने शहर को बर्बाद कर दिया।”
न्यायमूर्ति घुगे ने कहा, “हमने विशेष रूप से प्रदर्शनकारियों से कहा था कि वे हटने से पहले उस इलाके की सफाई करें, लेकिन वे भाग गए और सफाई का पूरा जिम्मा नगर निगम को उठाना पड़ा।”
कोर्ट ने इस याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसे 28 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया। पीठ ने कहा, “प्रदर्शन किसी भी दिन किया जा सकता है, इसमें कोई विशेष तात्कालिकता नहीं है।”
गौरतलब है कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने 29 अगस्त 2023 को आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। हजारों की संख्या में उनके समर्थक मुंबई पहुंचे थे, जिससे दक्षिण मुंबई की गतिविधियाँ प्रभावित हो गई थीं। 3 सितंबर को सरकार के साथ बातचीत और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जरांगे ने आंदोलन वापस ले लिया था।

